संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरसी डिमरी की देखरेख में आपसी सुलह के आधार पर 14,499 में से 13,950 मुकदमों का निस्तारण किया गया। मुआवजे के रूप में 3 करोड़ 03 लाख 67 हजार 945 रुपये की राशि देने का काम किया गया।
लोक अदालत को लेकर छह बेंच लगाए गए थे। इनमें पांच यमुनानगर-जगाधरी तथा एक बेंच व्यासपुर अदालत में लगाया गया था। अदालत परिसर में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसके लिए हेल्प डेस्क भी लगाए गए। वहीं लोक अदालत को लेकर लोग सुबह ही कोर्ट परिसर में पहुंचना शुरू हो गए थे। पिछली बार 13 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत हुई थी, तब 16,024 में से 14,856 मामलों का निपटान किया गया था।
शनिवार को आयोजित हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश (पारिवारिक न्यायालय) डाॅ. अमित शर्मा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश गुप्ता, मुख्य न्यायाधीश इंदु बाला, सिविल जज (जूनियर डिविजन) हरलीन कौर, सिविल जज (जूनियर डिविजन) प्रियांक गोयल व सिविल जज (जूनियर डिविजन) सब-डिवीजन, ब्यासपुर सिंद्धात रॉयल ने दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामलों का निपटारा किया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक मामले, धारा-138 के तहत एनआई एक्ट के मामले, बैंक रिकवरी केस, एमएसीटी मामले, वैवाहिक विवाद मामले, श्रम विवाद मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली और पानी से संबंधित मामले (गैर शमन योग्य मामलों को छोड़कर) वेतन और भत्ते तथा पुन: परीक्षण लाभ से संबंधित सेवा मामले, और राजस्व व अन्य सहायक मामले निपटाए गए।
बिजली बिल माफ करने की अफवाह
राष्ट्रीय लोक अदालत में बिजली बिल माफ करने की अफवाह रही। ऐसे में लोग अपने-अपने बिल लेकर कोर्ट परिसर में पहुंचे। लोग कभी कोर्ट परिसर तो एडीआर सेंटर में भटकते। पुलिस ने बिजली के बिल लेकर आए लोगों को समझा कर उन्हें लौटाया गया। लोगों में इस अफवाह को लेकर काफी गुस्सा देखा गया। बहुत से लोग किराया भाड़ा लगाकर लोक अदालत में अपने बिलों को माफ या कम कराने की उम्मीद से पहुंचे थे। रानी, ऊषा, सोमलता तथा अशोक, सोमनाथ व जगबीर ने बताया कि शहर की हमीदा, सरोजिनी, गुलाब नगर से बिल कम कराने के उद्देश्य से यहां आए थे। समस्या का हल नहीं होने पर लौटना पड़ रहा है।
13950 मामलों का निपटान किया गया। लोक अदालतें शीघ्र व सरल न्याय का सबसे अच्छा माध्यम हैं। इसमें दोनों पक्षों के समय और धन की बचत होती है और आपसी सहमति से मामलों का निपटान होने से संबंध में मधुरता आती है। -सुमित्रा कादियान, सचिव एवं सीजेएम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण।
बिजली बिल माफ करने की अफवाह पर कोर्ट परिसर में जुटी लोगों की भीड़। संवाद
बिजली बिल माफ करने की अफवाह पर कोर्ट परिसर में जुटी लोगों की भीड़। संवाद