आकारण फीस बढ़ाने व खर्चों के नाम पर अभिभावकों से नाजायज रुपये वसूलने की पांच माह से बंद पड़ी जांच की फाइल फिर से खुल गई। जिसके बाद आरोपित स्कूलों के प्रतिनिधि अपने कई दस्तावेजों के साथ शिकायतकार्ता के सामने जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में उपस्थित हुए। यह जांच फीस एंड रैगुलेट्री कमेटी अध्यक्ष एवं अंबाला मंडल आयुक्त के आदेशों पर फिर से शुरू की गई। शिकायतकार्ता ने जिले के 11 नामी व बड़े स्कूलों पर अपने मन मुताबिक फीस बढ़ाने व मेंटेनेंस के नाम पर अभिभावकों से आए साल लाखों रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। डीईओ के सेवानिवृति के कारण मामला पांच माह से दबा पड़ा था। लेकिन अब यह फिर से खुल गया है। शुक्रवार को चार स्कूलों को उनके रिकार्ड के साथ बुलाया गया था। इस दौरान जगाधरी का एक नामी स्कूल जांच में शामिल नहीं हुआ। वहीं पहुंचे तीन स्कूलों ने अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए। जिसमें उनकी बिल्डिंग का सालाना मेंटेनेंस चार्ज और बसों का मेंटेनेंस चार्ज एक बराबर था। वहीं एक स्कूल जिसके पास 19 बसें हैं। उसका सालाना बिल्डिंग का मेंटेनेंस चार्ज 60 लाख रुपये है और बसों का मेंटेनेंस चार्ज 52 लाख रुपये है।
बता दें कि उक्त सहित जिले के कुल 11 नामी स्कूलों पर हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल 2003 में जिन फंड्स व फीस का जिक्र नहीं, वो वसूलने व हर साल बिना औचित्य फीस बढ़ाने का आरोप है। इस संबंध में जागृति फाउंडेशन ने फीस एंड रैगुलेट्री कमेटी अध्यक्ष एवं अंबाला मंडल आयुक्त को 21 मई को शिकायत दी थी। जिसके बाद अध्यक्ष ने 29 मई को इसकी जांच जिला अधिकारी को सौंपी थी। लेकिन इस दौरान वे सेवानिवृत हो गए। इसके बाद जिलास्तरीय कमेटी बनी। जिसका अध्यक्ष डीईओ को बनाया गया। जबकि 3 डिप्टी डीईओ व सेक्शन ऑफिसर शामिल किए गए। जिसके बाद कमेटी ने आरोपी 11 स्कूलों का रिकॉर्ड मांगा। लेकिन कमेटी को अभी तक सभी स्कूलों का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। अब इस मामले की जांच नवनियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी जोगिंद्र हुड्डा कर रहे हैं। जिसके कमेटी ने 11 में से 4 स्कूलों को रिकॉर्ड के साथ डीईओ ऑफिस में तलब किया। बाकि शेष सात स्कूलों में से अगले सप्ताह चार व उसके अगले सप्ताह तीन स्कूलों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा।
बुड़िया निवासी सुरेंद्र मोहन जागृति फाउंडेशन के प्रेसिडेंट शिकायतकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि डीईओ कार्यालय पहुंचे स्कूलों ने अपना पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया। एक स्कूल ने तो उनके द्वारा शिकायत वापिस लेने का शपथ पत्र ही डीईओ को पेश कर दिया। लेकिन कमेटी ने कहा कि शिकायकर्ता की मौजूदगी में आप शपथ पत्र देकर शिकायत वापिस लेने की बात कह रहे हैं। जिस पर शिकायतकर्ता ने शपथ पत्र पर उनके हस्ताक्षर न होने की बात कही। जिस पर जाली शपथ पत्र देने की बात उठी तो स्कूल ने दूसरा सुरेंद्र मोहन पेश कर दिया।
जिसके बाद स्कूल को सख्त आदेश दिए गए कि वे पूरा रिकार्ड दें, ताकि जांच की जा सके और इसकी रिपोर्ट फीस एंड रैगुलेट्री कमेटी अध्यक्ष कम अंबाला मंडल आयुक्त को भेजी जा सके। इस दौरान अभिभावकों में अमित भाटिया, विरेंद्र मित्तल, गोतम गर्ग, संदीप दुग्गल, मुकेश दाबड़ा मौजूद रहे।
ये है पूरा मामला
जागृति फाउंडेशन प्रेसिडेंट सुरेंद्र मोहन ने बताया कि 2014 में बनी उनकी संस्था में 1200 अभिभावक जुड़ चुके हैं। तीन साल से निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर चल रहे मुनाफाखोरी के खेल चल रहा है। जिसके वे पुख्ता सबूत जुटाने में लग गए हैं। हर स्कूल फीस बढ़ाने से पहले पोर्टल पर फार्म-6 भरना होता है, इसलिए डीईओ कार्यालय से आरटीआई से स्कूलों के फीस बढ़ाते हुए 3 साल में फार्म-6 में दिया ब्यौरा हासिल किया। उनकी तीन साल की बैलेंसशीट भी ली। इसके लिए स्टेट पब्लिक इंफॉरमेशन ऑफिसर से अपील करनी पड़ी। फीस बढ़ाने स्कूलों के 3 साल के फार्म-6 में उन फंड्स व फीस का भी जिक्र मिला, जो हरियाणा स्कूल एजुकेशन रुल-2003 में नहीं है। स्कूलों की तीन साल बैलेंसशीट की विशेषज्ञ से जांच कराने पर पाया कि बैलेंसशीट में करोड़ों रुपये होने पर भी स्कूलों ने फीस बढ़ाई। इतना ही नहीं जिस स्कूल के लिए बच्चों से फंड लिया गया, उसे उसी स्कूल पर खर्च करने के बजाए किसी और कारोबार में खर्च किया गया।