इरादे मजबूत हों तो महिलाओं को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। इसका प्रमाण फरीदाबाद की कुछ महिलाएं दे रही हैं। समाज की सोच को बदलने के साथ-साथ ये महिलाएं औरों को भी प्रेरणा दे रही हैं।
निशा खान: कन्या भ्रूण हत्या के प्रति कर रही हैं जागरूक
सेक्टर-29 निवासी निशा खान भारतीय ग्रामीण महिला संघ (राज्यपाल इस संगठन के प्रधान हैं) की जिले की पहली महिला ग्रुप लीडर व ऑल इंडिया वूमेन काउंसिल की पहली महिला सदस्य हैं। इसके अलावा वे कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों के खिलाफ कई स्थानीय संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं। निशा बताती हैं कि वे सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं, जब उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद घर की परिस्थितियां बदलीं।
घर में सबसे बड़ी होने के कारण उन्होंने घर के बदले माहौल को बेहतर तरीके से देखा। उनकी पढ़ाई-लिखाई काफी तंग हालात में हुई। लड़कियों को लेकर उनकी मां को अकसर ताने सुनने पड़े। निशा ने बताया कि उन्होंने जब दूसरे धर्म के एके खान से शादी की तो लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा। लेकिन वह डटी रहीं। इस विरोध ने उन्हें ताकत दी और महिला सशक्तीकरण पर ध्यान दिया। ऐसा और कोई लड़की न झेले इसके लिए वे कन्या भ्रूण हत्या के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 15 साल से वे इस दिशा में काम कर रही हैं।
डीयू की टॉपर जयश्री चला रही हैं कोचिंग सेंटर
सेक्टर 19 में बीडी फाउंडेशन कोचिंग सेंटर का संचालन कर रहीं 26 वर्षीय जयश्री वर्ष 2005 में डीयू की टॉपर रही हैं। सेक्टर-21 सी निवासी जयश्री ने वर्ष 2005 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए में टॉप किया था। इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए दिल्ली में कोचिंग शुरू की।
जयश्री ने बताया कि कई बार कोचिंग कक्षाएं देर शाम को खत्म होती थीं। इसके कारण उन्हें अपने घर आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। जो परेशानियां उन्होंने देखीं, वे इस शहर की अन्य लड़कियां न झेलें, इसके लिए उन्होंने वर्ष 2011 में कोचिंग इंस्टीट्यूट आईएफएम (इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंसियल मैनेजमेंट) शुरू किया। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने सिविल सेवाओं के लिए कोचिंग सेंटर को सक्रिय कर दिया।
ताकि पढ़ाई न छूटे लड़की की
ओल्ड फरीदाबाद स्थित लक्ष्य ग्रामीण संस्था का संचालन 37 वर्षीय गीता सिंह कर रही हैं। गीता को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। फिर उनकी शादी करवा दी गई। गीता ने बताया कि वे 19 साल की थीं, जब उनकी शादी हुई। पढ़ाई छोड़ने का अफसोस उन्हें था, क्योंकि वे कामकाजी महिला की छवि चाहती थीं। ऐसा अन्य किसी लड़की के साथ न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने 2007 में संस्था को शुरू किया।
संस्था में लड़कियों को शामिल करना उनके लिए चुनौती था। क्योंकि पिछड़े वर्ग के लोगों का माहौल ऐसा नही होता कि वे अपनी लड़कियों को पढ़ाई-लिखाई की आजादी दें। इसके लिए उन्होंने अपने ससुराल के आसपास के घरों से शुरुआत की। लड़कियों के परिजनों को जागरूक किया। इसके बाद उन्होंने 25 लड़कियों के साथ अपनी संस्था को पंजीकृत करवाया। वर्तमान में संस्था में सिलाई, कढ़ाई व कंप्यूटर एजुकेशन लड़कियों को दी जा रही है।
ये भी कमा रही हैं नाम
शूटर अनिसा सैय्यद
:- 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में दो स्वर्ण पदक
:- 2006 सैफ खेलों में स्वर्ण पदक
:- राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
शूटर अनुराज सिंह
:- 2012 ओलंपिक में लिया भाग
:- 2010 कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक
:- राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल
अंतरराष्ट्रीय रेसलर नेहा राठी
:- 2011 में ऑस्ट्रेलिया में हुई कॉमनवेल्थ रेसलिंग में गोल्ड मेडल
:- 2012 में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल
:- 2012 में राष्ट्रीय रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल