पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा स्कूल टीचर चयन बोर्ड की नियुक्तियों के खिलाफ दाखिल याचिका को रद करते हुए याची को न सिर्फ कड़ी फटकार लगाई बल्कि उसे 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने इस मामले में स्पष्ट किया कि ज्यूडिशियल फोरम को राजनीतिक पब्लिसिटी का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने याचिका को राजनीति के प्रेरित मानते हुए याची विजय बंसल को निर्देश दिए कि वह 25 हजार रुपये की जुर्माना राशि दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में जमा करवाए।
शुक्रवार को याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार ने जो याची का चुनाव संबंधी रिकार्ड जमा करवाया है, उससे स्पष्ट झलकता है कि याचिका राजनीति से प्रेरित है।
याची विजय बंसल ने कांग्रेस पार्टी छोड़ी और 2009 में बहुजन समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। इससे साफ हो रहा है कि उनका सत्तासीन पार्टी के प्रति कैसा रवैया है।
यही नहीं याची बहुजन समाजवादी पार्टी को भी छोड़ चुके हैं और 2011 में उन्होंने इंडियन नेशनल लोकदल को ज्वाइन किया है।
उनके बयान की कॉपी और फोटोग्राफ जोकि अदालत के रिकार्ड में दाखिल हुए हैं, उससे उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का पता चलता है। हाईकोर्ट ने कहा कि उन्होंने इस मामले में पहले की याचिकाओं की सहारा भी लिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी लोकस स्टेंडाई (आधार) स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। इस मामले में हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के चेयरमैन को प्रतिवादी बनाया गया है।
विज्ञापन नंबर 6/2006 के तहत शारीरिक शिक्षा के अध्यापकों की नियुक्ति के मामले पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच उनकी कई बार आलोचना कर चुकी है।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेशों को रोक दिया है, क्योंकि किसी भी बोर्ड का चेयरमैन कंपीटेंट अथॉरिटी होता है और उसे अपने स्तर पर सारे फैसले लेने पड़ते हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का किसी भी प्रकार का असर चयन प्रक्रिया पर नहीं पड़ेगा। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हरियाणा में हजारों की तादाद में अध्यापकों को राहत मिल गई है।