दोनों पदों की मूल योग्यता 12 फरवरी 2018 को कार्यकारी परिषद की तीसरी बैठक में स्वीकृत हुई थी। इसके बाद 19 सितंबर 2020 को कार्यकारी परिषद की 16वीं बैठक में इन पदों के लिए अलग योग्यता तय की गई और 12 नवंबर 2020 को विज्ञापन जारी करने के आरोप की जांच में दोनों फैसलों की तुलना में अंतर पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक पहले स्वीकृत कुछ तकनीकी और संस्थान की मान्यता से जुड़ी शर्तें बाद के मानदंड में नहीं रखी गईं। इससे किसी खास को लाभ मिलने की संभावना बनती है और इसे पक्षपात की आशंका से जोड़ा गया है।
वरिष्ठ कौशल प्रशिक्षक के 25 और मास्टर कौशल प्रशिक्षक के 20 आवेदन आए। 13 दिसंबर 2021 को आवेदकों की लिखित और कौशल परीक्षा हुई। दस्तावेज जांच के बाद 14 जुलाई 2022 को साक्षात्कार और 22 जुलाई को परिणाम घोषित हुआ। पुरुष अभ्यर्थी का मास्टर कौशल प्रशिक्षक पद पर चयन हुआ। महिला अभ्यर्थी इस पद की मेरिट में दूसरे स्थान पर रहीं और बाद में वरिष्ठ कौशल प्रशिक्षक पद पर नियुक्त हुईं।
मास्टर कौशल प्रशिक्षक (संचार कौशल) के सात अभ्यर्थियों की अंकतालिका में साक्षात्कार के अंकों का अंतर सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। जांच रिपोर्ट के अनुसार दोनों चयनित पुरुष अभ्यर्थी और महिला अभ्यर्थी को साक्षात्कार में क्रमश: 17 और 15 अंक मिले, जबकि मेरिट में अन्य अभ्यर्थियों को 5.14 से 6.29 अंक के बीच ही अंक दिए गए। इस पर जांच अधिकारी ने संदेह जताया है।
चयनित महिला अभ्यर्थी को 21 मार्च 2022 की दस्तावेज जांच में अपात्र घोषित किया गया था। रिकॉर्ड में उनकी स्नातकोत्तर योग्यता को संबंधित क्षेत्र में नहीं होने के कारण उसका लाभ न दिए जाने का उल्लेख है। उन्हें कुछ शर्तें पूरी होने पर ही अस्थायी रूप से पात्र मानने की बात कही गई थी। लेकिन 6 अप्रैल 2022 की नई सूची में उन्हें पात्र घोषित कर दिया गया। उनकी बीएससी (आईटी) की पढ़ाई के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि छह सेमेस्टर में अंग्रेजी में संचार कौशल विषय केवल एक सेमेस्टर में पढ़ा गया था। जांच रिपोर्ट में इस योग्यता को विज्ञापन की अनिवार्य शर्त से जोड़ते हुए स्पष्टीकरण की जरूरत बताई गई। साथ ही वरिष्ठ कौशल प्रशिक्षक पद के लिए छह वर्ष के शिक्षण व प्रशिक्षण अनुभव के साथ दो वर्ष का औद्योगिक क्षेत्र में पर्यवेक्षकीय अनुभव भी जरूरी था। जांच अधिकारी के मुताबिक कि चयनित महिला कर्मचारी के पास यह आवश्यक औद्योगिक पर्यवेक्षकीय अनुभव नहीं था और इस आरोप को प्रमाणित माना।
जांच अधिकारी ने वरिष्ठ कौशल प्रशिक्षक की योग्यता में भी असमानता दर्ज की। स्नातकोत्तर अभ्यर्थी के लिए चार वर्ष का अनुभव जबकि स्नातक अभ्यर्थी के लिए छह वर्ष का अनुभव और दो वर्ष का औद्योगिक पर्यवेक्षकीय अनुभव रखा गया था। रिपोर्ट में इस अंतर को भी किसी खास समूह को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से तैयार मानदंड जैसा बताया गया। साथ ही वेतनमान को लेकर भी विसंगति सामने आई। विज्ञापन में वरिष्ठ कौशल प्रशिक्षक के लिए एफपीएल-8 और मास्टर कौशल प्रशिक्षक के लिए एफपीएल-9 दिया गया था। बाद में वित्त विभाग ने क्रमशः एफपीएल-6 और एफपीएल-7 तय किए। जांच में विश्वविद्यालय स्तर पर शुरुआती वेतनमान तय करने में नियमों की अनदेखी का सवाल उठाया गया जिसे बाद में वित्त विभाग के हस्तक्षेप से सुधारा गया।
चयनित महिला अभ्यर्थी ने तत्कालीन कुलपति से रक्त संबंध या करीबी रिश्ते से इन्कार करते हुए 24 नवंबर 2025 को शपथपत्र दिया था। हालांकि, इस तथ्य पर जांच रिपोर्ट में उनके पति के 3 फरवरी 2022 से कौशल परिषद का सदस्य होने और उपलब्ध तस्वीरों का उल्लेख किया गया है। इन तथ्यों के आधार पर जांच अधिकारी ने पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आरोप को प्रमाणित माना है।
श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में दो पदों पर भर्ती को लेकर अनियमितता की शिकायत आई थी। इस मामले में विभागीय स्तर पर हुई जांच की रिपोर्ट अभी मेरे पास नहीं आई है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर कुछ कहना संभव होगा। हालांकि, यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। -गौरव गौतम, मंत्री, युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता।