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यमुना का जलस्तर बढ़ा, फसलें हुई जलमग्न

Wed, 20 Jul 2016 12:29 AM IST
sonipat
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जलस्‍तर बढा़। - फोटो : amar ujala
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पहाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के चलते हिमाचल प्रदेश के पोंटागेज और यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने से जिले में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया है। सोनीपत जिले में 1 लाख क्यूसेक पानी के आने से नदी में उफान आना शुरू हो गया है। इसके चलते हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। जलस्तर के बढ़ने से आसपास के दर्जनों गांवों में खतरे का साया मंडराने लगा है। हालांकि नुकसान का सही आंकलन करना इसलिए मुश्किल हो रहा है, क्योंकि यमुना के अंदर में प्रयोग होने वाली जमीन का रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास नहीं है। अब ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि उफान के बाद जब फसलों को नुकसान पहुंचता है तो किसानों को मुआवजा किस तरह मिलता है।   
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बाढ़ से बचाव को लेकर प्रशासन कर चुका है दौरा
गत 20 जून को उपायुक्त के. मकरंद पांडुरंग ने अधिकारियों के साथ यमुना नदी में बाढ़ नियंत्रण को लेकर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जितनी भी ठोकरों का काम बाकी है उसे एक सप्ताह में पूरा कर रिपोर्ट करें। इसके अलावा यमुना पर लगातार पेट्रोलिंग की जाए ताकि बरसात के मौसम में किसी भी तरह की घटना से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें। इसकी शुरुआत उन्होंने बेगा से ही की थी।

प्रशासन के दौरे के बाद भी नहीं हुआ ठोकरों का निर्माण
यमुना नदी से लगते 20 गांव आते हैं। यहां के ग्रामीण यमुना नदी से जुड़ी हजारों एकड़ जमीन पर फसल उगाते हैं। प्रशासन के दौरे के बाद भी कई जगहों पर ठोकरों का निर्माण नहीं हो सका। यमुना में आए उफान के चलते धीरे-धीरे कटाव भी शुरू हो जाएगा। इससे फसलें बर्बाद होंगी। जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारी ठोकरों की जिम्मेवारी एक-दूसरे पर डालते नजर आते हैं।
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समय पर काम नहीं होने से प्रशासन को कट्टे डलवा चलाना पड़ा है काम
ग्रामीणों का कहना है कि जहां ज्यादा जमीन के कटाव का खतरा रहता है, उस जगह विभाग द्वारा ठोकर नहीं गिराई गई। जब यमुना में पानी आने के बाद कटाव का खतरा बनता है तो प्रशासन को कट्टे डलवाकर काम चलाना पड़ता है। फिर भी पानी के तेज बहाव के कारण उनकी जमीन का हिस्से का कटाव होकर हर साल जमीन घटती रहती है। उनका कहना है कि प्रशासन अगर ऐसे ही लापरवाही बरती गई तो भविष्य में यमुना का पानी क्षेत्र के लिए भारी तबाही खड़ी कर सकता है।

राजस्व विभाग के पास नहीं यमुना के अंदर जमीन का रिकॉर्ड
जिला की सीमा में यमुना नदी के अंदर हजारों एकड़ जमीन है। जिस पर हर साल लाखों की फसल उगाई जाती है। उस जमीन का आंकड़ा आज तक राजस्व विभाग के पास भी नहीं है।

क्या कहते है लोग
यमुना में ठोकरें आज भी है कच्ची
यमुना नदी में प्रशासन द्वारा बाढ़ बचाव कार्य सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। अभी भी यमुना में बनाई गई ठोकरें कच्ची हैं, जिनमें पत्थर डालने बाकी हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अन्य किसानों के साथ मिलकर यमुना नदी में ठोकर बनाने के लिए मिट्टी डलवाई है।

बाढ़ बचाव कार्य नहीं होने से बर्बाद हो रही फसलें
हर साल उनकी फसलें यमुना के पानी में डूबकर बर्बाद हो जाती हैं। प्रशासन द्वारा बाढ़ बचाव के कार्य नहीं किए जा रहे हैं जिसके चलते इस वर्ष भी फसलों के बर्बाद होने का अंदेशा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खादर के अंदर 5 एकड़ में धान की फसल लगाई हुई है।

कई जगहों पर यमुना नदी के अंदर नहीं होता ठोकरों का निर्माण
उसने 10 एकड़ में सब्जी की फसल उगाई है, लेकिन गांव के पास यमुना नदी में एक भी ठोकर नहीं बनाए जाने से जलस्तर बढ़ने पर उसकी फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है। प्रशासन को चाहिए कि पीरगढ़ी के पास भी यमुना नदी के अंदर ठोकरों का निर्माण कराए।

यमुना के बढ़ते जलस्तर से क्षेत्रवासी परेशान, प्रशासन के प्रति रोष
गन्नौर। पिछले दो दिनों से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया है। हथिनी कुंड बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के बेगा घाट पर पहुंच जाने के कारण किसानों को चिंता सताने लगी है। यदि इसी प्रकार से जलस्तर बढ़ता रहा तो उनके खेतों में यमुना का पानी घुस जाएगा।  किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बाढ़ से बचाव के कार्य ठीक प्रकार से नहीं किए जा रहे हैं, जिसके चलते यमुना का जल खेतों में घुस सकता है।

यमुना नदी के आसपास के किसानों का कहना है कि बेगा घाट में कई जगह ठोकरें क्षतिग्रस्त हैं तो कई जगह ठोकरों का निर्माण ही नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण हथिनी कुंड बैराज से अगर ज्यादा पानी छोड़ना पड़ा तो ठोकरे सही नहीं होने से बाढ़ से होने वाले नुकसान का खामियाजा खादर के किसानों को भरना पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से यमुना में ठोकरों को मजबूत बनाने तथा अन्य राहत कार्य कराने की मांग की है।

17 जुलाई को पोंटागेज से यमुना में छोड़ा गया पानी
समय             पानी की मात्रा (क्यूसेक)
प्रात: 10 बजे        44598
11 बजे        44598
दोपहर 12 बजे    39627
1 बजे            31342
3 बजे            42481
सांय 4 बजे        49174
6 बजे            53660
7 बजे            34656

18 जुलाई को पोंटागेज से यमुना में छोड़ा गया पानी
प्रात: 6.00 बजे    36056
7 बजे            31342
9 बजे            50346
11 बजे        19240
दोपहर 12 बजे    19240
1 बजे         22835
2 बजे            12240
3 बजे            21060
सांय 4 बजे        31342
रात 8 बजे        15176
9 बजे            12500            

19 जुलाई को पोंटागेज से यमुना में छोड़ा गया पानी
प्रात: 9 बजे        3825
10 बजे        5437
11 बजे        57350
दोपहर 12 बजे    7350

सरकार की ओर से अभी तक कोई ऐसा आदेश नहीं आया है कि यमुना नदी के अंदर जमीन का रिकॉर्ड भी लिया जाए। हालांकि यमुना जब उफान पर होती है तो जमीन का कटाव होता है। साल में दो बार विभाग की ओर से गिरदावरी की जाती है। जिसके बाद सरकार को रिपोर्ट भेजी जाती है।
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-सुरेश कुमार, डीआरओ, सोनीपत
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