फोटो 12: सोनीपत के नागरिक अस्पताल में मानसिक रोगियों का उपचार करते मनो चिकित्सक डॉ. संदीप आंतिल
सोनीपत। बाइपोलर डिसऑर्डर (द्विध्रुवी विकार) से पीड़ित लोगों को समय पर उपचार जरूरी है। यह एक मस्तिष्क विकार है, जो व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और कार्य करने की क्षमता में परिवर्तन का कारण बनता है। अगर मां-बाप दोनों को बाइपोलर है, तो बच्चों में इस स्थिति के खतरा 40 फीसदी बढ़ जाता है। हर साल 30 मार्च को विश्व द्विध्रुवी विकार दिवस मनया जाता है। अस्पताल में इस तरह की मानसिक बीमार से जूझ रहे 400 लाेग हर माह उपचार कराने पहुंच रहे हें।
मनो चिकित्सक डॉ. संदीप आंतिल ने बताया कि तनाव या फिर नशे की लत से बाइपोलर का जोखिम बढ़ाते हैं। अगर कोई नींद न आना, आत्महत्या के ख्याल आना, अचानक वजन बढ़ना या कम होना जैसे लक्षण महसूस करता है, तो उसे फौरन चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट खुशी जिंदल ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर का सही इलाज संभव है और समय पर उपचार से लेने से सामान्य जीवन यापन कर सकता है। सबसे जरूरी यह है कि इस बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को समाज से समझ मिले।
द्विध्रुवी विकार के यह है लक्षण
- मरीज का ज्यादा बोलना
- ज्यादा गुस्सा आना
- व्यवहार में बदलाव आना
- कम नींद आना
- बड़ी-बड़ी बातें करना
फोटो 12: सोनीपत के नागरिक अस्पताल में मानसिक रोगियों का उपचार करते मनो चिकित्सक डॉ. संदीप आंतिल