फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंत्री ने फीस में राहत देने को पत्र लिखा तो यूनिवर्सिटी ने छोड़ दिए 2.25 लाख

Mon, 22 May 2017 12:51 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
admission - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
प्रदेश के एक मंत्री ने छात्रा को फीस में राहत देने के लिए पत्र लिखा तो मुरथल यूनिवर्सिटी ने छात्रा की पांच साल की पढ़ाई फ्री करते हुए 2.25 लाख रुपये ही छोड़ दिए। मंत्री को खुश करने के चक्कर में एक वरिष्ठ अधिकारी ने नियमों को बदलकर इस तरह की छूट दी। अन्य छात्रों के पास मंत्री की सिफारिश नहीं थी तो उनको चंद रुपयों की छूट मिली। यूनिवर्सिटी नियम के अनुसार, एससी-एसटी समेत अन्य किसी भी वर्ग में 25 हजार रुपये से ज्यादा की फीस माफ नहीं की जा सकती है। छात्रों के साथ यह भेदभाव भी उस समय हुआ, जबकि डीन स्टूडेंट वेलफेयर कार्यालय ने अपने नोट में साफ लिख दिया था कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि इस मामले में 2.25 लाख रुपये की छूट दी जाए। लेकिन इस नोट को भी अनदेखा कर दिया गया।
विज्ञापन


यह है मामला
प्रदेश के एक मंत्री ने वर्ष 2016-17 के सत्र में एडमिशन लेने वाली एक छात्रा के लिए दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल को पत्र लिखा कि छात्रा की बात सुनकर इनको राहत दी जाए। हालांकि, पत्र में ऐसा कुछ नहीं लिखा था कि कितनी फीस की राहत दी जाए या उनको यूनिवर्सिटी में फ्री में पढ़ाया जाए। मंत्री का पत्र आया तो हलचल बढ़ गई। उक्त छात्रा को फीस में राहत देने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी ने डीन स्टूडेंट वेलफेयर कार्यालय को फाइल भेज दी। डीएसडब्ल्यू कार्यालय से नोट लगा दिया गया कि छात्रा को यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार 15 हजार रुपये हर साल के हिसाब से छूट दी जा सकती है। ऐसे छात्रों को 15 हजार रुपये की छूट दी गई है और इस नोट के साथ फाइल को वापस वरिष्ठ अधिकारी के कार्यालय में भेज दिया गया।

मंत्री को खुश करने के लिए भेदभाव
वर्ष 2016-17 में इस तरह अन्य कई छात्रों का प्रार्थना पत्र फीस माफी के लिए आया हुआ था। लेकिन उनमें से अधिकतर को 15-25 हजार रुपये तक की छूट दी गई और किसी की पढ़ाई फ्री नहीं की गई। वहीं, मंत्री को खुश करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी ने नियमों को पूरी तरह से अनदेखा कर हर साल की लगभग 45 हजार रुपये की फीस छोड़ दी और इस तरह पांच साल के कोर्स में उसकी 2.25 लाख रुपये फीस छोड़ी गई। डीन स्टूडेंट वेलफेयर कार्यालय की ओर से इस मामले को इसलिए उठाया गया, क्योंकि इस तरह छात्रों के साथ भेदभाव किया गया। किसी को नियम विरुद्ध फायदा दिया गया तो किसी के साथ नियम के अनुसार चला गया। अगर इस तरह फीस में छूट देनी चाहिए थी तो केवल मंत्री का पत्र लाने वालों को यह छूट क्यों मिली।
विज्ञापन


आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को पढ़ाई में परेशानी नहीं हो, इसके लिए यूनिवर्सिटी की ओर से फीस में छूट दी जाती है। लेकिन इस तरह किसी को छूट दी गई है, यह मामला मेरे सामने नहीं आया है। इसलिए इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता है। - प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें