सोनीपत। जिले में शनिवार रात को तेज हवा के साथ जमकर बारिश हुई। इससे कई जगह बिजली के खंभे टूटने से बिजली सप्लाई बाधित रही और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बारिश से गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत मिली।
जिले में शनिवार रात को औसतन 40 एमएम बारिश से तापमान में चार डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं बारिश के साथ तेज हवा के कारण पेड़ टूटकर बिजली के तारों पर गिरने से 200 से ज्यादा खंभे गिरने के साथ ही कुछ टूट गए। इन खंभों के टूटने से निगम को 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिससे शहर के कई हिस्सों व गांवों में बत्ती गुल हो गई और बूस्टिंग स्टेशन को भी पानी सप्लाई नहीं हो सकी। जिससे कई कालोनियों में लोग पानी को भी तरस गए। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार सप्ताहभर बारिश के आसार बने रहेंगे। बारिश से धान रोपाई का कार्य जोर पकड़ेगा। उधर, नालों की सफाई में 364 कर्मी लगे होने के बाद भी बारिश के बाद सड़क तालाब बन गई थी।
प्रदेश में मानसून ने जून माह के अंतिम सप्ताह में ही दस्तक दे दी थी, लेकिन जिले में मानसून के सक्रिय न होने की वजह से लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। दिन का तापमान 41 डिग्री के आसपास बना हुआ था, लेकिन उमस की वजह से लोगों की हालत खराब थी। गर्मी और उमस की वजह से बिजली की खपत भी बढ़ गई थी और लोगों को अघोषित कटों का सामना करना पड़ रहा था। शनिवार देर रात ढाई बजे तेज हवाओं के साथ बारिश से लोगों को काफी राहत मिली। जिलेभर में मानसून की बारिश हुई। खरखौदा में सबसे अधिक 60 एमएम तो सोनीपत में सबसे कम 18 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान तेज हवाएं भी चली। बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज हुई। रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 37 डिग्री दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार सप्ताहभर बारिश के आसान बने रहेंगे और दिन का अधिकतम तापमान घटकर 33 डिग्री के आसपास आ जाएगा। बरसात की वजह से शहर में वायु गुणवत्ता के स्तर में भी सुधार हुआ। रविवार को शहर में वायु गुणवत्ता का स्तर 49 रहा।
गांवों और शहरों में बिजली बाधित
एसई मुकेश चौहान ने बताया कि बारिश के साथ आई तेज हवाओं के कारण सोनीपत शहर के साथ विभिन्न गांवों में 200 से ज्यादा खंभे गिरने के साथ ही टूट गए। इससे बिजली निगम को 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिसके चलते बिजली सप्लाई बाधित हो गई। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शुगर मिल के पास कामी रोड पर सब स्टेशन से शहर के बूस्टिंग स्टेशनों को जोडने वाली बिजली लाइन पर पीपल का पेड़ गिर गया। जिसकी वजह से बिजली के पांच खंभे टूट गए। जिसके चलते ऋषि कॉलोनी, ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, राज मोहल्ला बूस्टिंग स्टेशन से करीब दो घंटे तक बिजली सप्लाई नहीं हो गई। पानी नहीं आने कारण आसपास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा गोहाना क्षेत्र, हरसाना कलां, कामी, कुराड़, मुरथल, लिवासपुर समेत आसपास के विभिन्न गांवों के साथ लगते खेतों में 25 से ज्यादा खंभे टूटने से बिजली सप्लाई बंद हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर को सप्लाई सुचारू हो सकी। जिससे लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। एटलस रोड पर नीम का पेड़ उखड़कर बिजली के तारों पर जा गिरा। जिसकी वजह से रात के समय मॉडल टाउन क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। पेड़ सड़क के किनारे खड़ी एक बस पर जा गिरा। गनीमत रही कोई चोटिल नहीं हुआ।
सफाई में लगे 364 कर्मी, फिर भी नालों से नहीं हो सकी निकासी
मानसून की बारिश से शहरी क्षेत्रों में लोगों की परेशानी बढ़ गई। शहर के गीता भवन चौक के पास सीवरेज लाइन जाम होने की वजह से दूषित पानी सड़क पर बहता रहा। जिसकी वजह से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अतिरिक्त बहालगढ़ रोड, कामी रोड, गोहाना रोड पर जलभराव की समस्या रही। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के बाद भी कई गलियों में पानी भर गया था।
खरखौदा में मानसून की पहली बारिश से बिगड़े हालत
खरखौदा में मानसून की पहली बारिश ने ही प्रशासन की पोल खोलकर रख दी। शहर ही नहीं गांवों में भी जलभराव हो गया। रोहणा में सड़क व गलियां पानी से भर गई। दिल्ली मार्ग पहले से ही जलभराव की समस्या से जूझ लोगों की हालत बारिश ने बिगाड़ दी। नालों व सीवरेज लाइन की विधिवत सफाई करवाने की जरूरत है। सब्जी मंडी जलमग्न हो गई है। जिससे भी आढ़ती व दुकानदार परेशान रहे।
किसानों को राहत, जोर पकड़ेगा धान रोपाई का काम
बारिश ने किसानों को काफी राहत दी है। बारिश के बाद धान रोपाई का काम तेजी पकड़ सकेगा। अभी तक करीब 22000 हेक्टेयर में ही धान रोपाई हो सकी थी। जबकि 85000 हेक्टेयर में रोपाई व बिजाई का लक्ष्य है। वहीं करीब नौ हजार हेक्टेयर में उगाई गई ज्वार व हरे चारे की फसलों को भी काफी फायदा होगा। गर्मी के कारण इन फसलों पर बुरा असर पड़ रहा था। जिले में कपास की भी साढ़े छह हजार हेक्टेयर में बिजाई की गई है। बारिश से किसानों को सिंचाई का खर्च काफी हद तक कम हो गया है। इसके अतिरिक्त अब किसान बिना सिंचाई किए ही बाजरे आदि फसलों की बिजाई कर पाएंगे।
वर्जन
बारिश से किसानों को काफी फायदा पहुंचा है। धान उत्पादक किसानों के साथ-साथ ज्वार, कपास सहित अन्य फसल उत्पादक किसानों का भी सिंचाई का खर्च कम हुआ है। मानसून के अगले कई दिनों तक सक्रिय रहने की संभावना है। इसका लाभ कृषि क्षेत्र को मिलेगा। किसानों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अब धान रोपाई का कार्य जोर पकड़ेगा। विभाग आसानी से लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। किसानों को धान के अलावा अन्य फसल उगाने को भी प्रेरित किया जा रहा है।
- डा. अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।