खरखौदा। शहरवासियों को अभी बंदरों का आतंक और झेलना पड़ेगा। इसका कारण नगरपालिका की तरफ से टेंडर को रद्द करना है। ऐसे में खरखौदा वासियों को अभी बंदरों से निजात नहीं मिलेगी।
मार्च में नगरपालिका ने बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया था। जिसमें केवल एक ही एजेंसी ने बंदर पकड़ने के लिए टेंडर भरा, लेकिन कंपनी की ओर से बंदर पकड़ने के रेट ज्यादा होने के कारण नपा ने उसे रद्द कर दोबारा लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
शहर में काफी समय से बंदरों के आतंक के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि घरों के अंदर भी लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। बंदर घरों के अंदर घुसकर न केवल लोगों को काट रहे हैं, बल्कि सामान भी उठाकर ले जाते हैं। खरखौदा की गलियों में बंदरों के झुंड बनाकर घूमना आम बात हो गई है। शहर में फल व सब्जी आदि की रेहड़ी लगाने वाले लोग भी बंदरों के आतंक से परेशान हैं। बंदर उनका भी सामान उठाकर ले जाते हैं। शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलवाने के लिए नपा की ओर से टेंडर लगाया गया था। टेंडर के लिए एक ही एजेंसी आगे आई और उसने भी प्रति बंदर को पकड़ने के लिए 2500 रुपये की मांग की। यह रेट नपा को मंजूर नहीं हुआ। नपा अधिकारियों ने इस रेट को सामान्य रेट से चार गुना बताते हुए टेंडर को रद्द कर दिया। अब नपा के दोबारा टेंडर लगाने के बाद ही बंदर पकड़ने की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। ऐसे में कुछ और दिन लोगों को बंदरों का आतंक झेलना पड़ेगा।
वर्जनशहर से बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर लगाया गया था, लेकिन टेंडर भरने वाली कंपनी ने बंदर पकड़ने के औसत से चार गुना रेट मांगा था। नपा ने कंपनी का टेंडर रद्द कर दिया है। बंदर पकड़वाने के लिए नपा दोबारा टेंडर लगाएगी। -पंकज जून, नपा सचिव, खरखौदा।