सोनीपत। बड़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित उद्योगों से बिना शोधन किए छोड़ा जा रहा पानी नजफगढ़ के नाले से होते हुए यमुना में मिलकर उसे प्रदूषित कर रहा है। मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में एक याचिका दायर की गई है। इस पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने दो सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह कमेटी अब वास्तविक स्थिति का पता लगाएगी।
याचिका में बताया गया है कि बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उद्योगों से बड़ी मात्रा में निकलने वाले पानी को शोधन करने के लिए पर्याप्त सीईटीपी नहीं है। एक सीईटीपी से 16 एमएलडी पानी ही शोधन किया जा रहा है, जबकि यहां के उद्याेगों से बड़ी मात्रा में दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि की दो सदस्यीय कमेटी गठित की है। जो उद्योगों से सीधे ड्रेन नंबर-6 में सीधे छोड़े जा रहे पानी, सीईटीपी की क्षमता सहित अन्य मामलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाएगी।
एनजीटी ने सीईटीपी व ड्रेन नंबर-6 के डिस्चार्ज प्वाइंट से लेकर नजफगढ़ नाले तक नमूने की जांच करने के साथ ही तीन माह में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता वरुण गुलाटी ने बताया कि डाइंग उद्योगों से पंप लगाकर पानी सीधे ड्रेन नंबर छह तक पहुंचाया जाता है। एचएसआईआईडीसी इस संबंध में अपना कार्य करने में विफल रहा है। एचएसपीसीबी के अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया था। जिसमें एक जांच टीम के अवलोकन उपरांत जिम्मेदार 30 आरोपियों पर मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था, लेकिन मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिलने से मामला आगे नहीं बढ़ा।