सोनीपत : लोकसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई है। अब 4 जून को परिणाम घोषित होने के बाद ही पता लग सकेगा कि किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा। चुनाव संपन्न होते ही आंकड़ों का गुणा भाग लगाया जाने लगा है। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 8.62 फीसदी मतदान कम हुआ है।
चुनाव में खास बात यह रही कि ग्रामीण के मुकाबले शहरों में मतदान प्रतिशत और भी कम रहा है। शहरों में कम मतदान का असर भाजपा पर पड़ सकता है। गांवों में ज्यादा मतदान कांग्रेस के लिए बेहतर हो सकता है। विधानसभा अनुसार देखे तो सोनीपत में तो 60 फीसदी का आंकड़ा भी छू सके। यहां महज 57.3 फीसदी मतदान हुआ है, जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में यहां पर 64 फीसदी मतदान हुआ था। माना जा रहा है कि शहर में ज्यादा मतदाता भाजपा के पक्ष में थे, तो यहां पर कम मतदान होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सका। खरखौदा में भी कमोबेश ऐसा ही हाल है। यहां का कम मतदान प्रतिशत कांग्रेस की चिंता बढ़ा सकता है। खरखौदा को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। जुलाना, जींद व सफीदों का मतदान उत्सुकता को बढ़ा रहा है। अनुमान लगाना बेहद कठिन है कि यहां के मतदाताओं ने किसे अपनी पहली पसंद बनाया है। गोहाना व राई में 63 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है। हालांकि पिछले चुनाव में यहां 70 फीसदी से अधिक मतदान हुआ था और इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा विजयी रही थी। इसके विपरीत बरोदा में लगभग पिछली बार के बराबर ही मतदान हुआ है पिछली बार यहां से कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा ने जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही गन्नौर में पिछली बार से कम मतदान हुआ है। यहां भाजपा कांग्रेस में कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
पांच से 13 फीसदी का रहा अंतर
सोनीपत की सभी छह सीटों पर मतदान का प्रतिशत पांच से 13 प्रतिशत तक कम रहा है। ऐसे में सोनीपत के छह हलकों में 60.88 फीसदी मतदान रहा। बरोदा में पिछले चुनाव के 73.0 फीसदी के मुकाबले इस बार 60.9 फीसदी, खरखौदा के 69.0 फीसदी के मुकाबले 57.8 फीसदी मतदान हो सका है। वहीं गन्नौर में 71.1 के मुकाबले 61.2, गोहाना में 73.75 के मुकाबले 63.3, राई में 71.0 मुकाबले 64.5, सोनीपत में 64.0 के मुकाबले 57.3, जींद में 68.5 के मुकाबले 62.8, जुलाना में 73.85 मुकाबले 68.2 व सफीदों में 73.85 के मुकाबले 66.8 फीसदी मतदान रहा।