भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर बेवजह हल्ला मचाया जा रहा है। यह वही लोग कर रहे हैं, जिन्हे लगता है कि उनकी राजनीतिक जमीन खिसकने वाली है। कृषि कानूनों को लेकर किसानों को बरगलाया जा रहा है। सच्चाई यह है कि ये कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के समुचित विकास के लिए लागू किए हैं। भाजपा सदैव साफ नियत व स्पष्ट नीति से काम करती है।
वह सोमवार को सोनीपत भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक है, फिर भी भाजपा सरकार ने किसानों का मुद्दा होने के कारण इसे गंभीरता से लिया। किसान संगठनों से बातचीत शुरू की। सरकार कानूनों में कुछ बदलाव करने को तैयार भी हुई थी, लेकिन राजनीतिक दलों के प्रभाव में आकर किसान संगठन जिद पर अड़े रहे। सरकार जब भी कृषि कानूनों की कमियों के बारे में पूछती है तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता। ऐसे में कानूनों को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं। उन्होंने कहा कि लालकिले जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले किसान नहीं हैं और उनकी मंशा वार्ता की भी नहीं है। जहां तक किसानों की भलाई का सवाल है तो उनके पक्ष में सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने केसीसी शुरू किया था। उससे पहले किसान को ऋण ही नहीं मिलता था, जिससे वह अपने घर की जरूरतों के लिए धन नहीं जुटा पाता था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है, जिसमें जानबूझकर कुछ राजनीतिक दल रोड़ा अटका रहे हैं। लेकिन भाजपा सरकार किसानों के पक्ष में कदम उठाती रहेगी। हर कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों को कृषि कानूनों के प्रति जागरूक करेगा। उन्होंने भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक ली और इस दौरान पौधरोपण भी किया। इस दौरान राई विधायक मोहन लाल बड़ौली ने उन्हें स्मृति चिह्न हल दिया। इस दौरान मुकेश मान, डॉ. शंभू कुमार, विधायक सुखविंद्र मांडी, योगेशपाल अरोड़ा, किरण बाला सिंह, पुनीत राई आदि मौजूद रहे।