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बिचपड़ी के दो परिवारों का हुक्का-पानी बंद

Sun, 16 Oct 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोहाना
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सामाजिक बहिष्‍कार - फोटो : sonipat
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उपमंडल के गांव बिचपड़ी में जमीन के बंटवारे को लेकर आहूलाना बारह पंचायत का फरमान न मानने पर दो परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया। एक सप्ताह पहले किए गए कथित सामाजिक बहिष्कार के लिए बाकायदा गांव में मुनादी करवाई गई कि जो व्यक्ति वीरभान व उसके चाचा धर्मबीर के परिवार से बात करेगा उस पर पंचायत 500 रुपये और संबंध रखने पर 5100 रुपये जुर्माना लगाएगी। एक सप्ताह से दोनों परिवार घर में कैद होकर रह गए हैं। उन्हें दुकान से दूध तक नहीं मिल रहा। साथ ही खेतों में फसल कटवाने के लिए मजदूर भी नहीं मिल हे। पीड़ित परिवारों ने डाक के माध्यम से पुलिस के आला अधिकारियों के पास शिकायत भेजी है।
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पीड़ित परिवार वीरभान ने बताया कि उसके पिता पांच भाई थे। इनमें सबसे बड़े रामनारायण, गंगाराम, आजाद सिंह, धर्मवीर व गुलाब सिंह शामिल हैं। वीरभान के पिता आजाद सिंह, ताऊ रामनारायण व गंगाराम की मौत हो चुकी है। धर्मवीर व गुलाब उसके दो चाचा जीवित हैं। बकौल वीरभान, उसके दादा मांगेराम खासा के पास कुल 20 एकड़ जमीन थी। उन्होंने करीब 25-30 साल पहले अपने पांचों बेटों को 4-4 एकड़ जमीन पांच हिस्सों में बांटकर दे दी। सभी ने इस बंटवारे को तहसील में रजिस्टर्ड कराते हुए इंतकाल अपने-अपने नाम करा लिया। रामनारायण ने मरने से पहले अपने हिस्से की जमीन गुलाब सिंह को दे दी। इस पर पूरे परिवार को कोई एतराज नहीं था, क्योंकि रामनारायण ने गुलाब के बेटे सुमित को गोद ले रखा था। अब गुलाब सिंह वीरभान के हिस्से में से जमीन का कुछ हिस्सा देने की मांग कर रहा है। इसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। 

धौली चौपाल में हुई पंचायत, फैसला न मानने पर कर दिया हुक्का-पानी बंद 
वीरभान ने बताया कि रविवार को गांव की धौली चौपाल में करीब ढाई सौ लोगों की पंचायत हुई। अध्यक्षता आहुलाना बारहा के प्रधान मलिक राज मलिक ने की। दोनों पक्षों में सहमति के लिए गांव में कई बार पंचायत हो चुकी है। रविवार को भी दोनों पक्षों में समझौता कराने के लिए 12 गांवों की पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें सहमति नहीं बन सकी। वीरभान अपनी हिस्से की जमीन गुलाब सिंह के परिवार को देने के लिए तैयार नहीं हुआ। आरोप है कि इसके बाद कथित तौर पर वीरभान और उसका साथ दे रहे उसके दूसरे चाचा धर्मबीर के परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का फरमान जारी कर दिया। इसके लिए बाकायदा गांव में मुनादी भी कराई गई। 
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चौकीदार बोला, सरपंच पति के कहने पर कराई मुनादी
पंचायत के इस कथित फरमान की मुनादी करने वाले गांव के चौकीदार जगदीश ने पुष्टि करते हुए बताया कि उसने गांव की सरपंच राजरानी के पति रमेश व गांववासी रोहतास व रामकरण के कहने पर वीरभान व उसके चाचा धर्मबीर का हुक्का-पानी बंद करने के पंचायत के फैसले की मुनादी की थी। मुनादी के समय रामकरण उसके साथ गया था। 

मेरी मौजूदगी में नहीं सुनाया गया फैसला : प्रधान आहुलाना बारह 
आहुलाना बारह के प्रधान मलिक राज मलिक से जब पूरे मामले की जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने इस बात से साफ इंकार कर दिया। कहा कि उनकी मौजूदगी में पंचायत ने किसी के सामाजिक बहिष्कार को फैसला नहीं सुनाया है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों ने उन्हें पंचायत में बुलाया था। उन्होंने दोनों पक्षों में समझौता कराने का प्रयास किया था, लेकिन समझौता नहीं हो सका। इस कारण वह पंचायत छोड़कर चले गए थे। हुक्का-पानी बंद करने के फैसले का उन्हें दो दिन पहले ही पता चला है। पीड़ित परिवार को हुक्का-पानी बहाल कराने के लिए ही वह गांव में आए हैं। उनके साथ बरोदा निवासी ईश्वर सिंह व भगवाना भी थे।

हम पंचायत की बात से सहमत : गुलाब पक्ष  
दूसरे पक्ष गुलाब सिंह के परिवार के सदस्यों रोहतास व रामकरण का कहना है कि उन्होंने फैसला भाईचारे पर छोड़ दिया था। पंचायत में बहिष्कार करने का कोई फैसला नहीं हुआ था। उनका कहना है कि उनके पूर्वजों द्वारा जमीन का जो बंटवारा किया गया था, उसमें कुछ खामियां रह गईं थी। अब वे यही कह रहे हैं कि जिसकी जहां जमीन है, वह वहीं अपनी जमीन ले ले। लेकिन धर्मवीर और वीरभान इस बात पर सहमत नहीं हो रहे थे, इसलिए पंचायत बुलाई गई थी।

फरमान से व्यथित हो सामूहिक आत्महत्या का लिया था फैसला
वीरभान और उसकी पत्नी रितू ने कहा कि हुक्का-पानी बंद करने का फरमान सुनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी अन्य परिवार को यह दंश न भुगतना पड़े। उन्होंने कहा कि पंचायत द्वारा फरमान जारी करने के बाद पूरे परिवार ने संयुक्त रूप से आत्महत्या करने का फैसला किया था, लेकिन लोकलाज व अपने बच्चों का भविष्य खराब न हो इसलिए उन्होंने फैसला बदल लिया। पहले तीन दिन उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। गांव कोई भी व्यक्ति उनसे बात नहीं करता है और न ही उन्हें कोई सामान दे रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जमीन के बंटवारे को लेकर किसी को शंका है तो अदालत में जाएं।

नहीं मिली शिकायत, पुलिस की पूरी नजर
पुलिस को इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। गांव में पुलिस की पूरी नजर है। यदि दोनों पक्षों में किसी प्रकार का झगड़ा होता है तो पुलिस अपना काम करेगी। बाकी, शिकायत आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यदि किसी पक्ष को कोई खतरा है तो उसे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।  
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