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निजी कंपनी के पेहवा और अंबाला कैंट सेल्स प्रभारियों की मौत

Fri, 08 Jan 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला गन्नौर (साेनीपत)
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जीटी रोड पर बड़ी गांव के पास महाकाली मंदिर के सामने पानीपत से दिल्ली की तरफ जा रहा ट्राला यमराज बन गया। नियंत्रण बिगड़ने से ट्राला डिवाइडर पार कर दूसरी लेन पर आ गया, जिसकी चपेट में आने से निजी कंपनी के दो सेल्स प्रभारी अंबाला कैंट निवासी राजन उर्फ वीरेंद्र व पेहवा निवासी जगजीत सिंह की मौत हो गई, जबकि घरौंडा निवासी पंकज बाल-बाल बच गया। वीरेंद्र अंबाला कैंट की खटीक सभा के युवा प्रधान थे।
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पुलिस के मुताबिक वीरेंद्र, जगजीत व पंकज निजी कंपनी में अपने-अपने एरिया के सेल्स प्रभारी रहे। दो दिन पहले गाजियाबाद कंपनी की मीटिंग में गए थे। बुधवार रात वापस लौटते समय राई स्थित ढाबे पर खाना गया। तीनों ने घर फोन करके बताया कि जल्दी आ जाएंगे, अभी राई से निकल रहे हैं।

हादसे में बाल-बाल बचे पंकज ने बताया कि जब कार बड़ी गांव के पास काली माता के मंदिर के नजदीक पहुंची तो अचानक दूसरी तरफ से आ रहा ट्राला डिवाइडर पार कर कार के सामने आ गया। चालक वीरेंद्र ने कार को दूसरी तरफ करने का प्रयास किया, लेकिन ट्राला कार को घसीटते हुए सड़क किनारे ले गया।
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पंकज को होश आया तो वीरेंद्र व जगजीत बेहोश मिले
घरौंडा निवासी पंकज ने बताया कि उसे अगले ही पल होश आया। उसने वीरेंद्र व जगजीत को हाथ लगाकर देखा, दोनों बेहोश थे। तुरंत कार से बाहर निकल कर पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया। साथ में घर पर फोन करके बताया कि आज वह नहीं आ पाएगा। उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया है। उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि वह बाल-बाल बच गया। इसी बीच एंबुलेंस पहुंच गई। दोनों को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

घर जाकर क्या जवाब दूंगा भूमि को
अंबाला कैंट से सिविल अस्पताल सोनीपत बेटे का शव लेने आए बनवारी लाल ने कहा कि 32 वर्षीय बेटा वीरेंद्र बेहद होनहार था। समाज के लोगों ने उसे खटीक सभा का युवा प्रधान बनाया हुआ था। अब वह उसकी बेटी आठ वर्षीय भूमि को घर जाकर क्या जवाब देगा। इतना कहते ही बनवारी फूट-फूट कर रोने लगा। परिवार के दूसरे सदस्यों का भी डेड हाउस के बाहर रो-रोकर बुरा हाल था।

पंकज को मौत छू भी नहीं सकी
जाखो राखे साइयां मार सके न कोई। घरौंडा निवासी पंकज पर यह कहावत सटीक साबित हुई। वह अपने साथी वीरेंद्र व जगजीत के साथ एक ही कार में बैठकर गाजियाबाद से चला था। कार वीरेंद्र चला रहा था, जबकि पंकज उसके पास अगली सीट पर बैठा था। जगजीत पीछे वाली सीट पर था। जब कार ट्राले से टकराई तो वीरेंद्र व जगजीत को गंभीर चोटें आईं, जबकि पंकज को हाथ मामूली तौर पर जख्मी हुआ।
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