आहुति संस्था के प्रयासों से परिजनों ने लिया कमलेश के मरणोपरांत नेत्रदान का महा-निर्णय
फोटो : 23
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। समाज में जब भी कोई व्यक्ति परोपकार और मानवता की मिसाल पेश करता है, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाता है। ऐसा ही प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां रेलवे कॉलोनी निवासी स्व. कमलेश वधवा के परिजनों ने उनके मरणोपरांत नेत्रदान का महा-निर्णय लेकर समाज को एक नई दिशा दिखाई है। आहुति संस्था के मार्गदर्शन और सहयोग से हुए इस नेत्रदान ने यह साबित कर दिया कि मृत्यु के बाद भी इंसान जीवित रह सकता है और दूसरों के जीवन में उजाला फैला सकता है। इस दौरान रमन वधवा, जाहन्वी वधवा, सत्या वधवा, पकंज, आरजू, नीरज, अंजलि, अनिल दुरेजा, सीमा दुरेजा, गुलशन बजाज और सागर सेतिया उपस्थित रहे।
बीमारी से लंबी जंग के बाद निधन
रेलवे कॉलोनी निवासी कमलेश वधवा पिछले लंबे समय से अस्वस्थ थीं। बीमारी से जूझते हुए उन्होंने बुधवार देर रात अंतिम सांस ली। किसी अपने को खोने का दुःख परिवार के लिए असहनीय होता है, लेकिन इस कठिन घड़ी में भी वधवा परिवार ने बेहद संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिचय दिया। उन्होंने शोक के इस माहौल में भी यह विचार किया कि किसी और की दुनिया में अंधेरा न रहे।
परिवार की सहमति और संस्था का सराहनीय सहयोग
परिवार के सदस्यों की पूर्ण सहमति के बाद आहुति संस्था से संपर्क किया गया। संस्था के संस्थापक सुरेंद्र विश्वास ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। उनके समन्वय से दिल्ली के प्रसिद्ध श्राफ आई इंस्टिट्यूट से नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र लोहमार की विशेष टीम रोहतक पहुंची और पूरी सावधानी व गरिमा के साथ नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।