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राजस्व विभाग और एनएचएआई के बीच फंसे 400 से ज्यादा किसानों के 73 करोड़ रुपये

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सोनीपत-गोहाना रोड। - फोटो : Sonipat
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जीटी रोड मुरथल से जींद तक का सफर आसान करने के लिए नेशनल हाईवे को फोरलेन किया जाना है। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण तीन महीने पहले कर लिया गया और अब मुआवजा लेने के लिए 400 से ज्यादा किसान राजस्व विभाग व एनएचएआई के बीच फंसे हुए हैं। किसानों को राजस्व विभाग के कार्यालय का चक्कर काटने के बाद भी अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा नहीं मिल रहा है। इस नेशनल हाईवे के लिए एक हजार से ज्यादा किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ था। जिनमें से लगभग 600 किसानों को मुआवजा दिया गया और बाकी को मुआवजे के लिए परेशान किया जा रहा है। वहीं राजस्व विभाग व एनएचएआई के अधिकारी इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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नेशनल हाईवे-44 से सीधा जींद तक फोरलेन हाईवे बनाने की योजना तैयार की गई थी। जिसको सोनीपत के मुरथल से गोहाना होते हुए जींद तक 85 किमी बनाया जाना है। फोरलेन हाईवे के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की ओर से जिले में 26 गांवों के एक हजार से ज्यादा किसानों की 658 एकड़ जमीन का अवार्ड सुनाकर अधिग्रहण कर लिया गया। जिनमें से लगभग 600 किसानों को 450 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। लेकिन तीन महीने से 400 से ज्यादा किसान अपनी जमीन का मुआवजा लेने के लिए राजस्व विभाग कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इन किसानों को लगभग 73 करोड़ रुपये मुआवजे का होने के बावजूद नहीं दिया जा रहा है और उनको मुआवजे के लिए परेशान किया जा रहा है। जहां राजस्व विभाग के अधिकारी एनएचएआई की ओर से पूरे रुपये जारी नहीं होने की बात कह रहे हैं। वहीं एनएचएआई के अधिकारी अधिग्रहीत की गई जमीन का पूरा 523 करोड़ रुपया जारी किए जाने की बात कर रहे हैं। दोनों विभागों के अलग-अलग दावों के बीच मुआवजे के लिए 400 से ज्यादा किसान फंसकर रह गए। जिसके चलते उन्हें राजस्व विभाग के कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
एनएच के लिए गांवों से बाहर निकलेगा बाईपास
जिले में गांव मुरथल से लेकर ईशापुर खेड़ी तक 50 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाना है। इसे एनएचएआई की ओर से 60 मीटर चौड़ा फोरलेन किया जाएगा। वर्तमान में सोनीपत व गोहाना समेत विभिन्न गांवों बड़वासनी, मोहाना, लाठ, जौली, बड़ौता, पिनाना, बीधल, खेड़ी दमकन के बीच से सड़क निकल रही है। फोरलेन के निर्माण के लिए इन गांवों के बाहर से बाइपास बनाया जाएगा। इसके बाद लोगों को जींद तक जाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
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इन गांवों में की गई इतनी जमीन
मुरथल- 21 एकड़ 5 कनाल 18 मरले
अब्दुलपुर- 2 एकड़ 7 कनाल 8 मरले
देवडू- 16 एकड़ 8 मरले
जाहरी- 44 एकड़ 1 कनाल 10 मरले
पट्टी जाटान- 25 एकड़ 5 कनाल 3 मरले
बड़वासनी- 56 एकड़ 6 कनाल 7 मरले
भठगांव डुंगरान- 10 एकड़ 6 कनाल 16 मरले
खिजरपुर जटमाजरा- 11 एकड़ 4 कनाल 12 मरले
करेवड़ी- 4 एकड़ 6 कनाल 2 मरले
बादशाहपुर माछरी- 21 एकड़ 2 कनाल 3 मरले
नैना ततारपुर- 2 एकड़ 3 कनाल 1 मरला
मोहाना- 54 एकड़ 7 कनाल 10 मरले
तिहाड़- 11 एकड़ 6 कनाल 11 मरले
पिनाना- 36 एकड़ 5 कनाल 3 मरले
बीधल- 29 एकड़ 7 मरले
जौली- 19 एकड़ 6 कनाल 2 मरले
लाठ- 10 एकड़ 2 कनाल
खेड़ी दमकन- 40 एकड़ 2 कनाल 18 मरले
बड़ौता- 23 एकड़ 2 कनाल 7 मरले
गोहाना- 15 एकड़ 3 कनाल 3 मरले
महमूदपुर- 27 एकड़ 5 कनाल 9 मरले
गंगेसर- 33 एकड़ 14 मरले
बिचपड़ी- 44 एकड़ 6 कनाल 8 मरले
बुटाना कुंडू- 42 एकड़ 3 कनाल 7 मरले
बुटाना खेतलान- 13 एकड़ 5 कनाल 2 मरले
ईशापुर खेड़ी - 36 एकड़ 5 कनाल 15 मरले
एनएचएआई नहीं दे रहा 73 करोड़ रुपये : डीआरओ
डीआरओ ब्रह्मप्रकाश अहलावत ने कहा कि एनएच 352ए के निर्माण के लिए जिले में 658 एकड़ जमीन का अवार्ड सुना दिया गया था। लेकिन एनएचएआई की ओर से 73 करोड़ रुपये नहीं मिलने के कारण किसान कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इस संबंध में एनएचएआई को पैसे जारी करने के लिए सूचित कर दिया गया है।
हमने पूरा रुपया दिया, अफसरों से बात करेंगे : प्रोजेक्ट डायरेक्टर
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशीष जैन ने कहा कि एनएच 352ए के निर्माण के लिए सोनीपत जिले के किसानों की अधिग्रहीत जमीन का पूरा रुपया जारी कर दिया गया है। अगले सप्ताह राजस्व विभाग के अधिकारियों संग बैठक कर समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके बाद किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। 15 दिन में मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन करेंगे
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र बढख़ालसा ने कहा कि पहले किसानों को उसकी जमीन का सही मुआवजा नहीं दिया जाता है और उसके बाद जमीन अधिग्रहण करके मुआवजे ठोकरें खिलाई जाती है। इस तरह किसानों को अपना ही रुपया देने के लिए अफसर परेशान करते हैं। अगर 15 दिन में किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया और उनको परेशानी किया गया तो भारतीय किसान संघ इसको लेकर आंदोलन करेगा।
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