शहर की रहने वाली युवती का अपहरण कर गैंगरेप के बाद उसकी नृशंस हत्या के मामले में पकड़े गए आरोपियों से 24 घंटे में पुलिस कुछ उगलवा नहीं सकी है। आरोपियों ने सिर्फ खाना खाने के लिए मुंह खोला, लेकिन कुछ भी बताने के लिए जुबान नहीं खोली। पुलिस के सामने मामले से जुड़ा कोई अन्य तथ्य उजागर नहीं किया। उधर, युवती की मां ने जिन छह अन्य लोगों पर आरोप लगाया था उनके खिलाफ पुलिस अभी तक कोई साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। पुलिस ने फिलहाल उन्हें क्लीन चिट देने से भी साफ इंकार कर दिया है।
रोहतक में मिला था शव
बता दें कि कि पुलिस ने रोहतक के पार्श्वनाथ सिटी में एक युवती का शव बरामद किया था। उसकी शिनाख्त सोनीपत की रहने वाली 20 वर्षीय युवती के रूप में हुई थी। युवती घर से नौ मई को फैक्टरी में जाने के लिए निकली थी। उसके बाद लापता हो गई। वारदात का खुलासा कीर्तिनगर के सुमित को सीआईए द्वारा तमंचे सहित पकड़े जाने पर हुआ था। उसने बताया था कि कबीरपुर निवासी विकास यादव के साथ मिलकर उसने युवती की हत्या की है। मंगलवार को रिमांड अवधि के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस आरोपियों से कुछ खास नहीं उगवा सकी है।
छह आरोपियों की संलिप्तता का नहीं मिल रहा साक्ष्य
इस मामले में युवती की मां ने तीन दिन पहले पुलिस को बताया था कि इस मामले में आरोपी का भाई कुलदीप व अमित, उसकी मां शीला व उनके पड़ोस में रहने वाले बेद, नवीन और विनोद की भूमिका भी संदिग्ध है। जिस पर पुलिस ने सभी छह को भी जांच में शामिल कर लिया था। हालांकि पुलिस की जांच में उनकी संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया है। उसके बावजूद पुलिस उन्हें क्लीन चिट नहीं दे रही है।
वर्जन
पुलिस मामले में हर पहलू पर बारीकी से जांच कर रही है। मामले में मुख्य आरोपियों के अलावा जिन छह लोगों को जांच में शामिल किया गया हैं उनके वारदात में शामिल होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें क्लीन चिट भी पुलिस नहीं दे रही। रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से हर सवाल का जवाब लेने का प्रयास किया जा रहा है।
-अश्विन शैणवी, पुलिस अधीक्षक।