वर्ष 1996 में शहर में हुए दो बम धमाके करने के आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को सोमवार को जिला अदालत में पेश किया गया।
कड़ी सुरक्षा के बीच टुंडा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगदीप सिंह की अदालत में लाया गया। सोमवार से टुंडा के केस में गवाई भी शुरू हो गई है। सोमवार को दो लोगों की गवाही हुई। इस मामले में अगली तारीख 11 नवंबर लगाई गई है।
सोनीपत में 28 दिसंबर, 1996 को दो बम ब्लास्ट हुए थे। उस दिन शाम के समय पहला धमाका बस स्टैंड के नजदीक तराना सिनेमा के सामने तथा दस मिनट बाद गीता भवन चौक स्थित गुलशन मिष्ठान भंडार के पास दूसरा धमाका हुआ था।
बम विस्फोट में लगभग 10 लोग घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने इंद्रा कालोनी के सज्जन सिंह के बयान पर मामला दर्ज किया था।
गाजियाबाद निवासी अब्दुल करीम टुंडा व उसके दो साथियों अशोक नगर पिलखुआ निवासी शकील अहमद और अनार वाली गली तेलीवाड़ा, दिल्ली निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था।
पुलिस ने शकील और कामरान को वर्ष 1998 में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टुंडा घटना के बाद से फरार था। 1998 में अब्दुल करीम टुंडा को उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया था।
शुरू हुई गवाही
सोमवार को बम विस्फोट के मामले में टुंडा के खिलाफ गवाही शुरू की गई। पहली गवाही शिकायतकर्ता सज्जन सिंह ने दी। सज्जन सिंह ने बताया कि वह अपने दोस्त अनिल के साथ फिल्म देखने गया था। इसी दौरान सिनेमा हाल के पास बम विस्फोट हुआ था। इसके बाद चिकित्सक की भी गवाही हुई।
कड़ी सुरक्षा में लाया गया टुंडा
अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को कड़ी सुरक्षा में सोनीपत लाया गया। टुंडा के साथ दिल्ली पुलिस के एसीपी किशन कुमार और निरीक्षक सूरजपाल की टीम थी। दिल्ली पुलिस के लगभग 20 जवानों के अलावा इतने ही जवान सोनीपत पुलिस के भी टूंडा के लिये अदालत परिसर में तैनात किये गये थे।