सोनीपत। डिजिटल अरेस्ट कितना खतरनाक है, ठग लोगों को कैसे बेवकूफ बनाते हैं, इसका अंदाजा सनसाइन काउंटी निवासी महिला रेनू तनेजा के साथ की गई वारदात से पता चलता है। साइबर ठगों ने रेनू को न सिर्फ छह दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा, बल्कि वीडियो कॉल पर ही फर्जी जज, पुलिसकर्मी बनकर उसे डराते रहे। 56 लाख रुपये की चपत लगने के बाद महिला को ठगी का का अहसास हुआ, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
कुंडली स्थित सनसाइन काउंटी निवासी रेनू तनेजा ने साइबर थाना पुलिस को बताया है कि 22 मई को मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार कंपनी का अधिकारी राजीव सिन्हा बताया। कहा, उनके आधार से एक मोबाइल नंबर जारी हुआ है। इस संबंध में मुंबई के कोलाबा थाने में मुकदमा दर्ज है। अब आप कोलाबा थाने में बात करें। अगर वे कहेंगे तो तुम्हारा नंबर चालू रहेगा।
इसके बाद रेनू को व्हाट्सएप कॉल के जरिए वीडियो कॉल से जोड़ा गया। वीडियो कॉल पर दिख रहे युवक ने अपना नाम संजय कुमार बताया। संजय ने रेनू से कहा, वह कोलाबा थाने से बोल रहा है। तुम्हारे आधार से जो सिम जारी हुआ है, उससे तुमने गोयल नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर केनरा बैंक से मनी लॉन्ड्रिंग की है। सीबीआई जांच कर रही है। इसके बाद रेनू के व्हाट्सएप नंबर पर एफआईआर कॉपी भेजी गई।
ठग बोला-डिटिजल अरेस्ट कर रहे हैं, कल अदालत से बेल कराएंगे
पुलिसकर्मी बनकर बात कर रहा ठग संजय बोला- आपको डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं। सीनियर सिटीजन होने के नाते कल अदालत से बेल करवाएंगे। हिदायत दी कि फोन नहीं काटना। रेनू तनेजा ने पूरी रात फोन चालू रखा। सुबह होते ही एक दूसरे नंबर से वीडियो कॉल से जोड़ा गया। बताया गया, जज साहब बात करेंगे। जज की वेशभूषा में बैठे शख्स ने दो मिनट बात की और बोला- इनको बेल नहीं दे सकते। केस में कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं, इसके बाद वह वीडियो से हट गया।
यहां से शुरू हुआ ठगी का खेल
ठग संजय बोला-आपके पास बैंक खाता भेज रहा हूं। जितने भी बैंक में रुपये या एफडी है, उसे तुड़वाकर इन खातों में ट्रांसफर करो। इसके बाद जमानत होगी।रेनू ने घबराकर 23 मई को एक खाते से 21 लाख और दूसरे खाते से 27 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद फिर उन्हें कॉल आई। इस बार अरेस्ट वारंट भेजा गया। धमकी देकर उनसे परिवार की बैंक की जानकारी मांगी गई। इस पर रेनू ने 8 लाख रुपये और दे दिए। 27 मई तक उनके पास कॉल्स आती रहीं। साथ ही कैमरे पर लाइव रहने के लिए कहा गया। इसके बाद भी ठग जमानत के नाम पर 10 लाख की मांग करते रहे। जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो परिजनों को अवगत करवाया। इसके बाद पुलिस में शिकायत दी गई।