सोनीपत। पशुपालन विभाग में पर्ची फीस के गबन का मामला सामने आया है। मामले में विभाग के तत्कालीन पांच एसडीओ समेत नौ लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि जिले के पशुपालन अस्पतालों में कृत्रिम गर्भाधान को लेकर काटी जाने वाली पर्चियों की राशि सरकारी खजाने में जमा ही नहीं कराई गई। इसमें 3 लाख रुपये से अधिक का गबन किया गया। मामले का खुलासा ऑडिट टीम आने पर हुआ था। जिसके बाद मामले में एक आरोपी को ही जांच दी गई। जिसके बाद नवंबर 2018 में करीब 70 हजार रुपये जमा करवा दिए गए। मामले को लेकर पशुपालन विभाग की चिकित्सक ने एडीजीपी सीआईडी को शिकायत भेजी तो उसकी जांच के बाद अब चिकित्सक के बयान पर नौ आरोपियों पर गबन का मुकदमा दर्ज हुआ है। सिटी थाना पुलिस मामले की जांच करेगी।
पशुपालन विभाग की चिकित्सक डॉ.रितू सिंह ने एडीजीपी सीआईडी को शिकायत दी थी कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों व सहायकों ने मिलीभगत कर व षड्यंत्र रचकर पशु अस्पतालों की पर्ची फीस में गबन किया है। मामले में जून, 2018 में ऑडिट हुआ था। जिसमें पर्ची फीस में भारी गड़बड़ी सामने आई थी। जिस पर तत्कालीन उपनिदेशक ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। जबकि गड़बड़ी के दौरान वह स्वयं सोनीपत में एसडीओ थे। साथ ही आरोप है कि मामले में जांच अधिकारी बनाए गए डॉ.राजबीर चहल भी इस मामले में शामिल थे। उन्होंने रिपोर्ट में अपना नाम शामिल नहीं किया था। महिला चिकित्सक का आरोप है कि पीएफआर के मुताबिक लेन-देन निम्न कर्मियों द्वारा किया जाता है। उसकी पड़ताल करना व संख्यांकित करना कार्यालय अध्यक्ष का काम है। अधिकारियों को फीस रसीद बुक पर हस्ताक्षर करते हुए देखना होता है कि फीस के रूप में जमा राशि उसी दिन या एक दिन बाद तक खजाने में जमा करानी होती है। उस राशि को जमा कराने में गड़बड़ी की गई। एडीजीपी सीआईडी व सीएम फ्लाइंग की टीम ने मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। जिस पर अब पुलिस ने डॉ.रितू के बयान पर उस समय के नियंत्रण अधिकारी डॉ. राजबीर, डॉ. जोगेंद्र, डॉ. सुरेंद्र, डॉ.हेतराम, डॉ. जसवंत व सहायक जोगेंद्र, पवन, सुभाष व सुरेंद्र के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भादसं की धारा 409 व 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। सिटी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जांच खुद ही कर जमा करवा दिए 70 हजार
महिला चिकित्सक का आरोप है कि जिन अधिकारियों का नाम गबन में लिया गया था वही इस मामले के जांचकर्ता बन गए। जिस समय गबन हुआ था उस समय डॉ.जसवंत दहिया एसडीओ थे और जांच के समय वही उप निदेशक बन गए थे। ऐसे में उन्होंने खुद ही कमेटी का गठन कराकर जांच करा ली। कमेटी डॉ.राजबीर को जांच अधिकारी बनाया गया था। मामले में अधिकारियों को विभाग के खर्च पर नियंत्रण रखने व अधीनस्थ कर्मचारियों से उगाही करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाद में नवंबर, 2018 में बिना विभाग की अनुमति के 70000 रुपये एसबीओ जींद के खाते में जमा करा दिए गए। महिला चिकित्सक का आरोप है कि बचने के लिए यह राशि जमा कराई गई थी।
एसीएस ने भी माना था हुई है गड़बड़ी
महिला चिकित्सक ने एडीजीपी सीआईडी को भेजी शिकायत में हवाला दिया था कि विभाग के एसीएस ने जांच के दौरान माना था कि मामले में गड़बड़ी हुई है। उनकी जांच की प्रति भी सीआईडी को दी गई थी।
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सीएम फ्लाइंग की तरफ से मामले की जांच करने के बाद मुकदमा दर्ज करने को पुलिस के पास भेजा गया है। जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। गबन के मामले में पूरी तरह से जांच कर मामले से पर्दा उठाया जाएगा।
डॉ.रवींद्र कुमार, डीएसपी सोनीपत।