किसी भी कार्य को पूरी शिद्दत के साथ किया जाए तो उसमें आपको सफलता जरूरी मिलती है। इस कथन को सत्य कर दिखाया है आर्य नगर निवासी एनएसएस की छात्रा निहारिका ने। राट्रीय स्वयं सेवा योजना (एनएसएस) के तहत बेहतरीन कार्य करने पर निहारिका को राष्ट्रपति भवन में शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय एनएसएस अवॉर्ड से सम्मानित किया। लाडली की इस उपलब्धि से परिजन फूले नहीं समा रहे हैं। निहारिका कहती हैं कि अब तक जो कहते थे कि क्या हमेशा गंदगी में घुसी रहती है, वही आज शाबासी दे रहे हैं।
निहारिका का कहना है कि सेवाभाव के गुण उसे विरासत में मिले हैं। निजी कंपनी में काम करने वाले पिता युद्घवीर सिंह ने हमेशा दूसरों का सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्हीं की प्रेरणा से बचपन में ही सेवा भावना के गुण पनपने लगे थे। हिंदू कन्या महाविद्यालय में दाखिला लेने के बाद एनएसएस ज्वाइन की। जिसने मेरी सेवा भावना को एक मंच प्रदान किया। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
निहारिका बताती हैं कि कोरोना काल में उन्होंने सेनेटरी नैपकिन, मास्क, सैनिटाइजर वितरित किए, जरूरतमंदों को खाना पहुंचाया, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का भी काम किया। इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर पहले शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने एनएसएस के राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय पुरस्कार से सुशोभित किया। निहारिका कहती हैं कि यह पुरस्कार सेवा भावना को और बेहतर तरीके से करने की प्रेरणा देगा। लाडली की इस उपलब्धि पर पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ रही है।
पहले डॉक्टर बनना चाहती थी, अब यहां सेवा कर संतुष्ट हूं
निहारिका बताती हैं कि वह पहले डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से यह संभव नहीं हो पाया। एनएसएस ज्वाइन करने के बाद भी लोगों की सेवा करने का मौका मिला। धीरे-धीरे यहां ऐसा मन लगा कि डॉक्टर बनने का सपना ही छोड़ दिया।
पिता भी राष्ट्रपति अवॉर्ड से हैं सम्मानित, अब बेटी भी उसी राह पर
निहारिका का कहना है कि मेरे पिता युद्घवीर सिंह ने वर्ष 1993-94 में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया था और तत्कालीन राष्ट्रपति पंडित शंकरदयाल शर्मा ने उन्हें नेशनल यूथ प्रोजेक्ट में राष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया था। मैं भी पिता की राह पर चल रही हूं। वर्ष 2020 में मैंने दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया था और अब राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त किया। निहारिका का कहना है कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। विपरीत हालात में भी आगे बढ़ते रहना चाहिए। किसी न किसी कदम पर प्लेटफॉर्म मिल ही जाएगा।