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18 हजार की आबादी वाले गांव मुरथल में पानी निकासी की नहीं व्यवस्था,गलियां भी खस्ताहाल

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गांव मुरथल में चाय की दुकान पर पंचायत चुनाव को लेकर चर्चा करते ग्रामीण। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। 18 हजार की आबादी वाले गांव मुरथल में 12 साल बाद पंचायत चुनाव हो रहे हैं। चुनाव को लेकर गांव में बैठकों का दौर लगातार जारी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सात साल बाद गांव में सरपंच मिलने से विकास कार्य फिर से गति पकड़ सकेंगे। बिना पंचायत के सरकार व प्रशासन की अनदेखी के कारण गांव की अधिकतर गलियां टूट चुकी हैं। पानी निकासी की व्यवस्था ठप पड़ी है। नगर निगम की तरफ से स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी, लेकिन बिना कनेक्शन के वह बंद पड़ी है। विकास कार्य ठप होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना पड़ रहा है। गांव में विभिन्न समस्याओं से परेशान 9996 मतदाता इस बार नई पंचायत चुनकर विकास कार्य कराने की बाट जोह रहे हैं।
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गांव मुरथल में वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव हुए थे। वर्ष 2015 में इस गांव को नगर निगम में शामिल कर लिया गया था। इसके चलते वर्ष 2016 में गांव में पंचायत चुनाव नहीं हो सके। गांव के निगम में शामिल किए जाने के बाद जीटी रोड से लेकर गांव तक स्ट्रीट लाइट लगाई गई। यह स्ट्रीट लाइट कुछ समय तक जली, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं लिए जाने के चलते बिजली निगम ने अवैध कनेक्शन काट दिया। जिसके बाद से स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है। ऐसे में रात होती ही सड़क पर अंधेरा छा जाता है। निगम की ओर से गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराया गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया था। ग्रामीणों के आंदोलन को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2018 में मुरथल समेत 12 गांवों को नगर निगम से बाहर कर दिया था। वर्ष 2019 में इन गांवों में पंचायती राज लागू कर दिया था। उसके बाद से पहली बार गांव में पंचायत चुनाव हो रहे है।
गांव में सात साल से पंचायत नहीं होने से हालात काफी बिगड़ गए हैं। गांव की चार चौपालों की स्थिति खराब है। चौपाल जर्जर हालत में हैं। गांव की ज्यादातर गलियां टूटी हुई है। पानी निकासी के अभाव में दूषित पानी गलियों में ही भरा रहता है। गांव में मुख्य बाजार में गली टूटी है। जिससे लोगों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। गांव में जोहड़ ओवरफ्लो होने से घरों तक में पानी भर जाता है। अक्सर गलियों में दूषित पानी भरा रहने से बीमारी फैलने का भय सताता रहता है।ग्रामीणों को उम्मीद है कि नगर निगम से बाहर होने के बाद गांव में चुनी जाने वाली पंचायत विकास कार्यों को लेकर पहल करेगी। ग्रामीण अपने-अपने प्रत्याशियों को चुनाव में जिताने के लिए चर्चा कर रहे हैं।
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सात साल को गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। सरकार व प्रशासन की अनेदखी के कारण चौपाल जर्जर हो चुकी हैं। अधिकतर चौपालों में ग्रामीणों ने बैठना भी बंद कर दिया है। ग्रामीणों की ओर से चौपालों की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन समस्या का अभी तक समाधान नहीं हो पाया है।
कृष्ण, ग्रामीण
गांव में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। सफाई कर्मी होते हुए भी गांव की गलियों में सफाई नहीं होती। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। प्रशासन को अवगत कराए जाने के बावजूद हालात बिगड़ रहे हैं। नई पंचायत का गठन होने के बाद गांव में विकास की बयार आने की उम्मीद है।
पवन, ग्रामीण
गांव में पानी निकासी की व्यवस्था ठप पड़ी है। नालों की सफाई न होने के कारण अधिकतर गलियां में पानी भरा रहता है। जिससे गलियों से गुजरने वाले ग्रामीणों को परेशानी होती है। साथ ही जोहड़ ओवरफ्लो हो रखे है। निकासी के लिए कोई विशेष प्रबंध नहीं है। बारिश के दिनों में हालात ज्यादा खराब हो जाते हैं।
जगमोहन, ग्रामीण
नगर निगम की ओर से जीटी रोड से लेकर गांव तक स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी। उसके बाद कुछ समय तक गांव की मुख्य सड़क पर रोशनी रही। बाद में बिजली निगम की ओर से कनेक्शन काट दिया गया। गांव में पंचायती राज लागू होने के बाद भी स्ट्रीट लाइटों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। आज भी लोगों को रात के समय अंधेरे में सड़क से गुजरना पड़ रहा है।
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राजेंद्र, ग्रामीण

गांव मुरथल स्थित बाजार में सड़क पर भरे दूषित पानी के पास से गुजरते लोग। संवाद- फोटो : Sonipat

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