फोटो : 02:छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षिका विद्यावती। संवाद
गन्नौर। राजकीय स्कूल में शिक्षकों की कमी लगातार सामने आ रही है। एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों में उच्च स्तर पर पढ़ाई की बात करती है तो दूसरी तरफ इनमें शिक्षकों की कमी सरकार के दावों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में दिन में छात्रों की संख्या कम हो रही है। मजबूरी में छात्र प्राइवेट स्कूल में जाने के लिए मजबूर हैं। ऐसा ही एक राजकीय प्राइमरी स्कूल गन्नौर के राजलूगढ़ी गांव में है जो सिर्फ नाम का स्कूल रह गया है। यहां पर शिक्षक नहीं होने से नाम मात्र के छात्र रह गए हैं।
स्कूल में अलग-अलग कक्षा के छात्र मिलाकर आठ हैं। उन सभी छात्रों पर सिर्फ एक टीचर है जो उन्हें पढ़ाने के साथ स्कूल में मिड-डे मील से लेकर सभी काम कर रहे हैं। शिक्षिका विद्यावती ने बताया कि स्कूल में वह अकेली हैं। उनके ऊपर स्कूल इंचार्ज से लेकर मिड-से मील व स्कूल रिकॉर्ड के साथ छात्रों को पढ़ाई करवाने का काम है।
स्कूल में शिक्षक न होने से लगातार छात्र कम होते जा रहे हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे तो स्कूल बंद करने की नौबत आ सकती है। वह कई बार विभाग को अवगत करा चुकी हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है। अगर वह छुट्टी पर चली जाती हैं तो दूसरे स्कूल से शिक्षक को बुलाकर छात्रों को पढ़ाया जाता है। इससे छात्रों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाती है। मजबूरी का आलम है कि सभी क्लास के छात्रों को एक साथ बैठकर पढ़ाया जाता है।
पांच कक्षा में आठ छात्र
बाल वाटिका-1
पहली कक्षा-1
दूसरी कक्षा-1
तीसरी कक्षा-1
चौथी कक्षा-4
वर्जन
जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया ने बताया कि जहां शिक्षकों की कमी है वहां परह जल्द ही एचकेआरएनके के तहत शिक्षक भेजे जा रहे हैं। जिस स्कूल में शिक्षकों की कमी है जल्द ही उनको पूरा किया जाएगा।
फोटो : 02:छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षिका विद्यावती। संवाद