खरखौदा। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में श्री प्राचीन शिव छपड़ेश्वर मंदिर में आयोजित हरियाणवी सांग महोत्सव का शनिवार को दूसरा दिन रहा। सांग की शुरुआत छपड़ेश्वर धाम के महंत मोहनदास ब्रह्मचारी ने की। पंडित लख्मीचंद के सुपौत्र विष्णु दत्त ने अपने सहयोगियों के साथ पुराने किस्से सुनाते हुए दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने दर्शकों को शाही लकड़हारे का किस्सा सुनाया।
विष्णु दत्त ने कहा कि जोधपुरी नगरी में राजा जोधा नाथ का राज था, जिनकी रूपाणी नाम की रानी थी। उसके पास कोई संतान नहीं थी। एक दिन दोनों के बीच लगी शर्त में हार जाने के बाद रानी को 12 वर्ष के लिए राज्य से निष्कासित कर जंगल भेज दिया जाता है। इस दौरान रानी गर्भवती थी। ऋषि के आश्रम में रहते हुए रानी ने बेटे को जन्म दिया। ऋषि ने लड़के का नाम शाही लकड़हारा रखा था। कुछ दिनों बाद रुपाणी का देहांत हो जाता है। वहीं पडोसी राज्य के राजा राय सिंह अपनी बेटी बीणा के साथ विवाद होने पर शाही लकड़हारे से शादी करवा देते हैं, लेकिन डाकू विजय सिंह व जालिम सिंह शाही लकड़हारे का अपहरण कर उसे बंदी बना लेते हैं।
राजा जोधा नाथ गंगा किनारे बीणा को अकेला देखकर अपनी पुत्री मान उसे अपने साथ महल ले आते हैं। वह अपने राज्य में घोषणा करते हैं कि जो भी शाही लकड़हारे की कथा सुनाएगा, उसे बड़ा इनाम दिया जाएगा। इसी दौरान शाही लकड़हारा डाकुओं के चंगुल से निकलकर राजा के दरबार में कथा सुनाने के लिए पहुंचता है। कथा सुनकर राजा जोधा नाथ को पता चलता है कि शाही लकड़हारा उसी का पुत्र है। बीणा उसकी पुत्रवधू है। इसके बाद शाही लकड़हारा परिवार सहित महलों में अपना जीवन व्यतीत करने लगता है। इस किस्से से पतिव्रत धर्म का ज्ञान प्राप्त होता है। इस दौरान नरेंद्र पाराशर, विजेंद्र पाराशर, सत्यनारायण व राजेश मौजूद रहे।