सोनीपत। 100 वर्ग गज प्लॉटों की मांग को लेकर बरोदा हलके के गांव बनवासा के ग्रामीणों ने सोमवार को लघु सचिवालय पर हल्ला बोल प्रदर्शन किया। बनवासा के ग्रामीण सुबह एकत्रित होकर लघु सचिवालय पहुंचे और अपनी मांग को लेकर सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ रोष जताया। ग्रामीणों ने कहा कि वह प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर विधायक व सांसद तक को अपनी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें प्लॉट नहीं मिले हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने 100 वर्ग गज प्लॉट के लिए साल 2008 में आवेदन किए थे, इसके बाद उन्हें जगह मुहैया करवाने की कोई सुध नहीं ली गई है। प्लॉट दिलवाने की मांग को लेकर वह कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं। सरकार जरूरतमंद वर्ग को प्लॉट देने में लापरवाही बरत रही है। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने प्लॉट की एवज में एक लाख रुपये देने की घोषणा की है, लेकिन बनवासा के ग्रामीणों को सरकार के रुपयों की बजाय प्लॉट चाहिए, ताकि वह अपना गुजर बसर कर सकें। ग्रामीण उपायुक्त से मिलने की जिद पर अड़े रहे। इसके बाद ग्रामीणों ने उपायुक्त के नाम नायब तहसीलदार राहुल बूरा को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर चांद, बिजेंद्र सिंह, रोहतास, मीना, मामो, लाली, सरोज, कमली, राजपाल, दिलबाग, पाला, बाला, बलजीत व सुनील मौजूद रहे।
बोलें ग्रामीण
ग्रामीणों ने 100 गज प्लॉट के लिए वर्ष 2008 में आवेदन किए गए थे। सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों ने आज तक ग्रामीणों को प्लॉट मुहैया नहीं करवाए हैं। अधिकारियों से लेकर विधायक व सांसद तक कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
सत्यवान, ग्रामीण
सरकार ने गांव में जमीन न होने की एवज में लाभार्थियों को एक लाख रुपये देने की घोषणा की है, जबकि गांव में कम से कम तीन हजार रुपये गज जमीन के दाम है। ऐसे में लाभार्थी बाकी की रकम कहां से लाएंगे। ग्रामीणों को रुपयों की बजाय प्लॉट मुहैया करवाए जाएं, ताकि गुजारा हो सके।
अतर सिंह, ग्रामीण
गांव में पंचायत के 36 किले जमीन है, लेकिन जरूरतमंदों के प्लॉट काटने के लिए पंचायती जमीन नहीं होने की बात कहीं जा रही है। करीब 16 साल से प्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी प्लॉट नहीं दिए जा रहे हैं। महंगाई के चलते गुजर बसर करना मुश्किल हो रहा है।
ईशवंती, ग्रामीण
महंगाई के दौर में जमीन खरीदना तो दूर बच्चे पालना मुश्किल हो रहा है, सरकार प्लॉट के बदले एक लाख रुपये देने की बात कह रही है। एक लाख लेने के बाद भी वह राशि घर के कार्यों में ही खर्च हो जाएगी। वह इतनी कम राशि में प्लॉट कैसे खरीदेंगे। जिससे उन्हें प्लॉट से वंचित रहना पड़ेगा। हमें पैसा नहीं, प्लॉट चाहिए।
पुष्पा, ग्रामीण