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सरकार को लिखित में भेजी कानून की खामियां, अब केवल कृषि कानून रद्द करने की बात रखेंगे, नहीं मानने पर आरपार की लड़ाई

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सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर धरना देकर बैठे किसानों की वीरवार को सरकार से बातचीत सकारात्मक नहीं होती है तो उसके बाद आरपार की लड़ाई की तैयारी कर दी गई है। जहां अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कानून की खामियां लिखित में सरकार को भेज दी है, वहीं वीरवार को होने वाली वार्ता में केवल एक ही कृषि कानून रद्द करने की बात रखी जाएगी। यह समिति ने साफ कर दिया है और यह मांग नहीं मानने पर आंदोलन को बढ़ाया जाएगा।
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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के सदस्य दर्शनपाल ने कहा कि सरकार ने केवल पंजाब के संगठनों को बातचीत के लिए बुलाकर बांटने का प्रयास किया। लेकिन सरकार को इसमें कामयाब नहीं होने दिया गया और उसमें कई संगठन के लोगों के नाम बढ़वाए गए। योगेंद्र यादव को सरकार ने राजनीतिक बताकर पहली बातचीत में नहीं बुलाया तो उनको लेकर बाद में स्थिति स्पष्ट की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को कानून की खामियां 7-10 पेज में लिखकर भेजी है और सरकार यह भी चाहती है कि किस तरह से कानून रद्द हो सकता है। वह भी हम एक्सपर्ट की राय के साथ लिखकर देने को तैयार है और उसके केवल एक दिन का संसद का सत्र बुलाकर पास कराया जा सकता है। उनके अनुसार यह आंदोलन देशव्यापी बन गया है और 3 दिसंबर को सरकार व कारपोरेट के विरोध में प्रदर्शन होंगे। 5 दिसंबर को सरकार व कारपोरेट घरानों के पुतले फूंके जाएंगे और 7 दिसंबर को किसानों के समर्थन में खिलाड़ी, कलाकार, सेवानिवृत्त जवान, अपने अवार्ड वापस लौटाएंगे। उनके अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, उड़ीसा आदि राज्यों के करीब 450 संगठन आ गए हैं। यूपी के भाकियू के राकेश टिकैत से उनकी बात हुई है और उन्होंने साफ कर दिया है कि जिस तरह का फैसला पंजाब के संगठन लेंगे। वह उनके फैसले के साथ आंदोलन करेंगे।
किसानों के इस मसले की गंभीरता को समझे सरकार
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के सदस्यों गुरनाम सिंह चढूनी, योगेंद्र यादव, शिवकुमार कक्काजी, रंजीत राजू ने कहा कि जिस तरह से किसानों के समर्थन में खिलाड़ी, सेवानिवृत्त जवान, कलाकार भी अवार्ड वापस करेंगे। उससे सरकार समझ सकती है कि किसानों का यह मसला कितना गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए यह खतरे की घंटी है और इसकी गंभीरता को समझकर सरकार को सभी मांग मान लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब केवल एक दिन है और इसके बाद किसान अपना आंदोलन तय करेंगे।
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आरएसएस का किसान संगठन आज की बातचीत के निष्कर्ष से लेगा आंदोलन पर फैसला
आरएसएस के किसान संगठन भारतीय किसान संघ की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश संयोजक सविता मोर ने कहा कि सरकार को किसानों की मांग को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह तीन दिसंबर की बातचीत का इंतजार कर रहे हैं। उससे कुछ हल नहीं निकला तो भारतीय किसान संघ भी आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि संघ की भी आंदोलन की तैयारी चल रही है और वह भी सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ अपनी तीनों मांगों पर कायम है। इनमें खरीद को एमएसपी के साथ जोड़ा जाए, ट्रेडर्स का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए व एग्रीकल्चर कोर्ट बननी चाहिए।
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