सोनीपत। मानव मिलन के संस्थापक एवं नेपाल केसरी राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि आज के प्रतियोगिता वादी युग में मनुष्य बड़ा व श्रेष्ठ बनने की होड़ में लगा है, लेकिन मनुष्य को सबसे पहले अच्छा इंसान बनना चाहिए। यही मनुष्य का प्रथम धर्म है।
डॉ. मणिभद्र महाराज सेक्टर-12 स्थित निजी स्कूल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मानव मिलन सम्मेलन के समापन समारोह में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वार्थ से ऊपर उठकर ही अपने अंदर सेवाभाव लाया जा सकता है। मानव सेवा को धर्म बनाकर ही दुनिया से अपराध व अन्य कुरीतियां समाप्त की जा सकती हैं। महावीर स्वामी ने भी अहिंसा का धर्म अपनाकर दुनिया में यही संदेश दिया।
जैन स्थानक से निकाली शोभायात्रा
सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व उत्तरप्रदेश सहित नेपाल से भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इससे पहले श्री एसएस जैन सभा की ओर से सेक्टर-15 स्थित जैन स्थानक से सम्मेलन स्थल तक शोभायात्रा निकाली। यहां गुरुदेव मणिभद्र महाराज, पुनित मुनि महाराज, महासाध्वी सृजना व अनुज्ञा महाराज ने लोगों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मानव मिलन के अध्यक्ष हर्ष कुमार मनोत ने की।
भारत व नेपाल में सेवा, शिक्षा व चिकित्सा पर जोर
डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि मानव मिलन संस्था भारत व नेपाल में सेवा, शिक्षा व चिकित्सा पर कार्यरत है। कोई भी आध्यात्मिक व्यक्ति संस्था के साथ जुड़कर इन सेवा के कार्यों में शामिल हो सकता है। मन में करुणा व दया का भाव है तो दूसरे की सेवा के लिए तत्पर रह सकते हैं। सम्मेलन में अभय कोटेचा, नारायण प्रसाद, महावीर प्रसाद जैन, मामन जैन, नारायण सिंह राणा, सलिल बिश्नोई, हरिप्रकाश मंगला, दीपक कोठारी, डॉ. राजू अधिकारी व कुसुम जैन मौजूद रहीं।