फोटो 27- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयो
सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) में नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ एवं तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री के ओएसडी प्रो. राज नेहरू ने शिरकत की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने की। अतिथियों ने नवागंतुक विद्यार्थियों की तिरंगा यात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया।
कुलपति ने विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति-2020 की जानकारी दी। मुख्य अतिथि प्रो. राज नेहरू ने कहा कि आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के अनुसार पहली सदी में विश्व की जीडीपी में भारत का योगदान 35 फीसदी था जबकि पहली सदी से पूर्व विश्व की जीडीपी में भारत का योगदान 55 फीसदी से अधिक रहा। भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने के पीछे शैक्षणिक व्यवस्था का अहम योगदान रहा। उस समय भारतीय प्रतिभा के मुकाबले में कोई नहीं था।
भारत में हुई चेस, सांप-सीढ़ी खेल की उत्पत्ति : वर्तमान में जिस खेल को हम चेक कहते हैं उसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी। उसका उस समय का नाम अष्टपदा था। इसका निर्माण भारतीय युवाओं को मेधावी बनाने के लिए किया गया था। इसी तरह सांप-सीढ़ी खेल भी है। इसकी उत्पत्ति भी भारत में ही हुई थी। इसका प्राचीन नाम मोक्षापदम था।
प्राचीन काल में भारतीय शैक्षणिक व्यवस्था गुणवत्तापूर्ण थी। भारतीय शिक्षा व्यवस्था के कारण ही भारत उस समय सोने की चिड़ियां कहलाता था। उस समय विदेशी भारत पर तो कब्जा कर पाए लेकिन वह भारतीयता पर कब्जा नहीं कर पाए। भारत अब अपने निर्णय स्वतंत्रता के साथ ले रहा है। वर्ष 2047 में देश का नेतृत्व आप स्वयं करेंगे।