सोनीतप। सर्दी व प्रदूषण की वजह से इन दिनों उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) का खतरा बढ़ गया है। जिला नागरिक अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक में रोजाना 200 से ज्यादा मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। एनसीडी क्लीनिक इंचार्ज डॉ. वृंदा की ओर से लोगों को इस मौसम में एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।
ठंड लगने पर शरीर की रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे खून को बहने में ज्यादा दबाव लगाना पड़ता है और बीपी बढ़ जाता है। सर्दियों में लोगों में आलस ज्यादा होता है। आमतौर पर लोग टहलना, व्यायाम करना और बाहर निकलना कम कर देते हैं। ऐसे में वजन बढ़ना और फिर बीपी बढ़ना बहुत आम हो गया है।
जिला नागरिक अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक में सर्दी की वजह से अस्पताल में रक्तचाप व शुगर के मरीज अधिक आ रहे हैं। डॉ. वृंदा ने बताया कि सर्दी व प्रदूषण के साथ 40 साल की उम्र में उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रसित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दिनचर्या बदलने के साथ रोजाना व्यायाम न करना है।
साथ ही अधिक नमक युक्त भोजन करने से रक्तचाप अधिक रहता है। अगर हम स्वस्थ जीवन शैली अपनाते हैं तो उच्च रक्तचाप से बच सकते हैं। साथ ही लोगों में शुगर की भी समस्या आ रही है। उच्च रक्तचाप से हृदयाघात, गुर्दे की बीमारी और विफलता, गर्भावस्था के दौरान दिक्कत, आंख की क्षति हो सकती है।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से कैसे बचें
चिकित्सक ने बताया कि खराब खानपान की आदतें शरीर को बीमारियों के जाल में फंसा रही हैं। ठंड में तले-भुने, नमकीन और ज्यादा फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ जाता है। ज्यादा नमक ज्यादा घी-तेल ये सभी हाई बीपी को और खतरनाक बना देते हैं। इसके अलावा कम शारीरिक क्रियाएं, ज्यादा तनाव लेना, स्ट्रेस कम करने के लिए शराब और सिगरेट ज्यादा पीना, गलत समय पर खाना खाना और नींद की कमी के कारण जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। बाहर का पैक्ड फूड, ड्रिंक्स और जंक फूड शरीर को खोखला बना रहे हैं। इससे बचने के लिए कम खाने और हेल्दी खाने की आदत बना लें। सप्ताह में 2-3 बार बीपी जरूर चेक करें। नियमित व्यायाम करें। नमक का सेवन सीमित रखें। एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक न लें।
सर्दियां बीपी के मरीजों के लिए एक साइलेंट खतरा बनकर आती हैं। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती है। सही खानपान, नियमित जांच और सावधानी अपनाकर इस मौसम में भी रक्तचाप को काबू में रखा जा सकता है।
- डॉ. वृंदा, इंचार्ज, एनसीडी क्लीनिक, जिला नागरिक अस्पताल