सोनीपत। केंद्रीय बजट को लेकर औद्योगिक, व्यापारिक और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स वर्ग को खासी उम्मीद है। उद्योगपतियों से लेकर व्यापार मंडलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स तक सभी की अपेक्षा है कि इस बार का बजट केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर विकास को गति देगा।औद्योगिक ढांचे में सुधार, कर प्रणाली का सरलीकरण और मध्यम वर्ग को सीधी राहत यही इस बजट से सबसे बड़ी अपेक्षाएं हैं।
औद्योगिक विकास को वास्तविक गति तभी मिलेगी, जब मल्टी स्टोरी इंडस्ट्रियल शेड की अवधारणा को गंभीरता से लागू किया जाए। इससे न केवल भू-माफिया पर प्रभावी अंकुश लगेगा बल्कि उद्योगों के लिए स्थान की समस्या का भी स्थायी समाधान निकलेगा। कई लोग औद्योगिक क्षेत्र में जमीन खरीद लेते हैं, लेकिन उद्योग स्थापित करने के बजाय उसे बाद में मुनाफे पर बेच देते हैं। इससे न तो रोजगार सृजन होता है और न ही औद्योगिक विकास। मैकेनिक सेगमेंट और छोटे-मध्यम उद्योगों को एक ही परिसर में व्यवस्थित तरीके से स्थापित किया जाए तो संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्पादन लागत भी घटेगी। चीन में इसी मॉडल पर काम हो रहा है, जहां एक ही बहुमंजिला औद्योगिक भवन में अनेक इकाइयां संचालित होती हैं।
- भूपेंद्र चौधरी, उद्योगपति, राई औद्योगिक क्षेत्र
उद्योगों के समग्र विकास के लिए सिंगल विंडो सिस्टम आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उद्योगपति का अधिकांश समय दफ्तरों के चक्कर लगाने में ही खर्च हो जाता है, जिससे न केवल मानसिक दबाव बढ़ता है बल्कि निवेश की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है। औद्योगिक क्षेत्र के भीतर ही सभी विभागों से संबंधित कार्य पूरे हो जाएं तो उद्योगों को नई दिशा मिल सकती है। अनुमतियां, कनेक्शन, पंजीकरण और अन्य औपचारिकताएं एक ही स्थान पर और तय समय सीमा में पूरी हों। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
- महेंद्र गोयल, उद्योगपति
केंद्रीय बजट से व्यापारी वर्ग की काफी उम्मीदें हैं। जीएसटी में राहत और सरलीकरण किया जाए। छोटे व्यापारियों के लिए त्रैमासिक रिटर्न किया जाए। ई-वे बिल की सीमा बढ़ाई जाए। आयकर में छूट और स्लैब में सुधार के साथ व्यापारियों के लिए बेसिक छूट सीमा बढ़ाई जाए। बिजली, पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्ट पर टैक्स में राहत दी जाए। सरकार टैक्स का बोझ कम करे, नियम सरल बनाए और व्यापार को प्रोत्साहन दें।
- संजय सिंगला, प्रधान, जिला व्यापार मंडल
व्यापारियों की सुविधा के लिए केंद्र सरकार को आयकर में बड़ी राहत देनी चाहिए। 15 लाख रुपये तक आय को आयकर मुक्त किया जाना चाहिए। इससे न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि बाजार में काले धन पर भी प्रभावी रोक लगेगी। इस बजट से व्यापारियों को काफी उम्मीदें हैं कि सरकार ठोस और व्यवहारिक फैसले लेगी।
- पवन गोयल, प्रधान,अनाज मंडी ट्रेडर्स एसोसिएशन
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मौजूदा स्टैंडर्ड डिडक्शन महंगाई के वर्तमान स्तर के मुकाबले अपर्याप्त हैं। इसे बढ़ाकर कम से कम 1.50 लाख रुपये किया जाना चाहिए ताकि मध्यम वर्ग को वास्तविक कर राहत मिल सके। इससे न केवल कर्मचारियों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी बल्कि घरेलू खर्च और बचत दोनों को संतुलन मिलेगा।
- पारुल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
सेक्शन 80सी, 80डी, 80 सीसीडी सहित अन्य कर कटौतियों की मौजूदा सीमाएं अब व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप नहीं रहीं। यदि इनकी सीमा बढ़ाई जाती है तो लोग बीमा, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे जरूरी क्षेत्रों में अधिक सुनियोजित निवेश कर पाएंगे। इससे एक ओर करदाताओं को राहत मिलेगी, तो दूसरी ओर दीर्घकालीन वित्तीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।
- हिमांशु, चार्टर्ड अकाउंटेंट
फोटो : भूपेंद्र चौधरी
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