माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। श्रीराम परिवार, सोनीपत की ओर से सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। संस्था के प्रमुख ओमप्रकाश अरोड़ा ने श्रीरामचरितमानस में भरत का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि भरत प्रसंग उनके भाई श्रीराम के प्रति अगाध प्रेम, निष्ठा और कर्तव्य को दर्शाता है। यह प्रसंग उनकी त्याग भावना को भी उजागर करता है क्योंकि वे अयोध्या के सिंहासन को स्वीकार करने के बजाय श्रीराम की पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर, नंदीग्राम से राम के प्रतिनिधि के रूप में शासन संभालते हैं।
वे अपने पिता की मृत्यु का समाचार पाते हैं तो अपनी माता कैकेयी से क्रोधित हो जाते हैं। अपनी मां के वरदान को ठुकरा कर वह श्रीराम को मनाने के लिए चित्रकूट जाते हैं। वह श्रीराम को लौटने के लिए मनाते हैं लेकिन श्रीराम अपनी प्रतिज्ञा पर अटल रहते हैं। इस पर भरत उनकी पादुकाएं लेकर लौट आते हैं।
इस अवसर पर दिनेश अरोड़ा, पवन सहगल, राकेश बहल, महेश पांडेय, दिनेश अरोड़ा, भोज दत्त, महेश,सुरेन्द्र,नरेश, मेहर चंद, मुकेश, कमल, अश्विनी, रमन कांत, मनोज आदि उपस्थित थे।