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मां के जयकारों से गूंजे मंदिर, आज की जाएगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

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इंद्रा कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में माता की पूजा करतीं महिलाएं। संवाद - फोटो : Sonipat
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शारदीय नवरात्र के पहले दिन सोमवार को भक्तों ने विधि-विधान से मां शैलपुत्री की पूजा की। मंदिरों में दिनभर माता के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने अपने घर में कलश स्थापित किया। मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए शाम होते ही भक्तों की भीड़ उमड़ने शुरू हो गई। मां की आरती के साथ ही मंदिरों में माता के जयकारे लगते रहे।
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माता चिटाने वाली मंदिर के पुजारी पंडित अमित शोनक ने बताया कि पहले दिन भक्तों ने मां शैलपुत्री का पूजन किया। वहीं दूसरे दिन मंगलवार को भगवती मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन माता के भक्त अपने मन को भगवती मां के चरणों में एकाग्रचित कर मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पंडित शोनक ने बताया कि ब्रह्मचारिणी देवी भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप है। मां ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है।
पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है मां का स्वरूप
पंडित शोनक ने बताया कि ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम अपने जिन देवी-देवताओं एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमंत्रित किया है, उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन से पूजा करें। उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत व मधु से भोग कराएं और देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं, उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता की पूजा करें। इनकी पूजा के बाद माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करें।
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पूजन की विधि
देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें। इसके बाद देवी को पंचामृत का भोग लगाएं और फिर फूल, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर अर्पित करें। घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है व मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
शतचंडी महायज्ञ शुरू
मॉडल टाउन स्थित श्री नवदुर्गा मंदिर में सात ब्राह्मणों की तरफ से विश्व कल्याणार्थ शतचंडी महायज्ञ शुरू किया गया। जिसमें मंदिर के पुजारी पंडित रामकृष्ण पाठक, कैलाश, ज्योति, सुरेश, वैद्यनाथ, बालकृष्ण नौ दिन तक दुर्गा पाठ व पूजन करेंगे। पंडित रामकृष्ण पाठक ने बताया कि पूजा में मंदिर के प्रधान सेनापति भरत भूषण, डीएल चोपड़ा, रमेश व अन्य शामिल हुए। पहले दिन यजमान दिल्ली से पहुंचे सुभाष व सरला ने वेदीपूजन कर मां शैलपुत्री की पूजा की।
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