सोनीपत। शहर सीट पर पूर्व संसदीय सचिव व पूर्व विधायक को छोड़कर कांग्रेस ने इस बार नए चेहरे पर दांव खेला है। कांग्रेस ने अनिल ठक्कर, देवराज दीवान व रवि परुथी की बजाय इस बार सुरेंद्र पंवार पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने करीब 42 साल बाद किसी गैर पंजाबी को विधानसभा की टिकट दी है।
भाजपा के साथ ही कांग्रेस ने भी कई सीटों पर बदलाव किया है। सोनीपत में कांग्रेस ने लंबे अर्से बाद किसी गैर-पंजाबी प्रत्याशी पर दांव खेला है। सोनीपत विधानसभा सीट पर कांग्रेस की तरफ से 42 साल बाद कोई गैर-पंजाबी मैदान में है। वर्ष 1972 में पंडित चिरंजी लाल सोनीपत से विधायक बने थे। इसके बाद से यह सीट कांग्रेस के लिए पंजाबी सीट बन कर रह गई थी। 1977 के चुनाव में विधायक चुनकर आए बाबू देवीदास लगातार 3 बार विधायक रहे। वह वर्ष 1977 के बाद 1982 व 1987 के चुनाव में विधायक चुने गए। इसके बाद 1991 में शामदास मुखीजा विधायक बने। इसके बाद दो बार देवराज दीवान निर्दलीय विधायक बने, जबकि उनके सामने कांग्रेस के पंजाबी प्रत्याशी ही थे। 2005 में कांग्रेस ने पूर्व मंत्री मोहनलाल ठक्कर के बेटे अनिल ठक्कर को मैदान में उतारा था, वह जीत दर्ज कर सोनीपत के विधायक बने। वर्ष 2009 फिर से कांग्रेस की ओर से अनिल ठक्कर मैदान में थे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जबकि वर्ष 2014 में देवराज दीवान कांग्रेस प्रत्याशी बने। अब 42 साल बाद कांग्रेस के गैर-पंजाबी प्रत्याशी के रूप में सुरेंद्र पंवार को मैदान में उतारा है। उन्होंने वर्ष 2014 के चुनाव मेें इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे। अब वह कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं। वह शुक्रवार को अपना नामांकन करेंगे।