माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। नवागंतुक विद्यार्थी चार वर्ष केवल परीक्षा, अंक और डिग्री तक सीमित न रखें। विश्वविद्यालय में प्रवेश विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह बातें दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने मंगलवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम में कहीं।
विद्यार्थियों को विचार करना चाहिए कि वह किस प्रकार के पेशेवर बनना चाहते हैं। किस प्रकार के नागरिक बनना चाहते हैं। जिस भारत में वह अपना भविष्य बनाएंगे, उस भारत के निर्माण में उनकी क्या भूमिका होगी। वर्ष 2047 का विकसित भारत कैसा होगा, यह केवल राष्ट्रीय प्रश्न नहीं है बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी से जुड़ा है।
कुलपति ने कहा कि दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी तकनीकें आने वाले दशकों में मानव जीवन, उद्योग व अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदलने वाली हैं। तकनीकी परिवर्तन अकेला नहीं आ रहा है।
इसके साथ जलवायु परिवर्तन, जल एवं ऊर्जा की उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, बेरोजगारी, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने हैं। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. सुरेश वर्मा, डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. एमएन मिश्रा, एडमिशन कोऑर्डीनेटर प्रो. दिनेश सिंह, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।