सोनीपत के सीआरपीएफ कैंप निवासी आंचल वालिया न्यायाधीश बनने पर मां संगीता को मिठाई खिलाते हुए। सं
सोनीपत। लक्ष्य तय कर कड़ी मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। सोनीपत के वेस्ट राम नगर फिलहाल सीआरपीएफ कैंप निवासी कांस्टेबल की बेटी आंचल वालिया ने सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रिजर्व कैटेगरी में तीसरा स्थान प्राप्त कर इसे साबित किया है।
सोनीपत के बहालगढ़ स्थित सीआरपीएफ कैंप निवासी संगीता ने बताया कि उनकी तीन बेटियों में आंचल सबसे बड़ी है। आंचल ने हरियाणा ज्यूडिशियरी के लिए मार्च 2024 में प्री एग्जाम दिया था। जुलाई में मेंस के लिए एग्जाम दिया। सितंबर में साक्षात्कार सफल रहा था। इसी सप्ताह परिणाम आया है। आंचन ने सफलता प्राप्त की है। आंचल के पिता सुरेंद्र कुमार बतौर जीडी सीआरपीएफ कैंप 143 बटालियन ने मणिपुर में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दो छोटी बेटियां अंजलि व आस्था भी वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जिस सपने को पिता पूरा नहीं कर पाए, बेटी ने जज बनकर उसे पूरा कर दिखाया है।
आंचल ने बताया कि उन्होंने साउथ प्वाइंट स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। फिर गुरु गोविंद इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी दिल्ली से बीए एलएलबी की। दो साल तक कोचिंग ली, ऑनलाइन माध्यम से भी पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2018 में इंटर्नशिप करने के लिए सोनीपत कोर्ट में जाना शुरू किया। पहले सरकारी वकील के लिए प्रयास किया था, लेकिन इंटरव्यू में असफल रहने पर मनोबल टूट गया था। परिवार ने हौसला दिया तो दोबारा कोर्ट जाना शुरू किया। जहां महिला जजों को देखकर जज बनने का लक्ष्य निर्धारित किया। मेहनत कर तैयारी की और अब सफलता मिली है।
दहेज ना जोड़ें, बेटियों को हीरा बनाएं
आंचल की मां संगीता एक गृहिणी हैं। उन्होंने कहा कि लड़के ना होने के बावजूद भी उन्होंने बेटियों को कभी बेटे से कम नहीं समझा। तीनों बेटियों का पालन-पोषण बेटे की तरह किया। संगीता का कहना है कि बेटियों की शादी में दहेज के लिए पैसा इकट्ठा ना करें, उनकी शिक्षा पर पैसा खर्च कर उन्हें हीरा बनाएं और उड़ने के लिए खुलासा आसमान दें, रिश्तों के लिए खुद ही लाइन लगने लगेगी। बेटी की उपलब्धि पर खुशी के मारे मां की आंखें छलक पड़ी।