प्राइवेट एंबुलेंस चालकों ने पैसेंजर, गुड्स टैक्स और रोड टैक्स के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से सरकारी एंबुलेंस सेवा पर जिलेभर की जिंदगियां निर्भर रही। चालकों के हड़ताल पर चले जाने से सरकारी एंबुलेंस सेवाओं के लिए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। चालकों का कहना है कि आधी रात से ही प्राइवेट एंबुलेंस का चक्का जाम कर दिया गया था। जब तक टैक्स माफ नहीं किया जाता तब तक वे हड़ताल जारी रखेंगे। चाहे उन्हें कुछ भी करना पड़े। इस अवसर पर प्रधान राजू दहिया, प्रवीण, काला, राकेश, भीम सिंह, जगवीर सिंह, रामकरण, धर्मपाल, महावीर, बिंदर, प्रदीप और संजय कुमार सहित अन्य निजी एंबुलेंस चालक मौजूद रहे।
परिजनों ने अपने वाहनों का किया प्रयोग
प्राइवेट एंबुलेंस चालकों के हड़ताल पर जाने से मरीजों को भारी परेशानी हुई। निजी एंबुलेंस नहीं मिलने पर परिजन अपने वाहनों से मरीजों को अस्पताल से घर और घर से अस्पताल ले गए। वहीं डिलीवरी के बाद प्रसूति महिलाओं को सरकारी एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।
पहले की थी एकदिनी हड़ताल
प्राइवेट एंबुलेंस चालकों ने बताया कि रोड टैक्स के विरोध में पहले भी प्रदेशभर में हर जिले में मीटिंग का आयोजन किया गया था। जहां डीसी के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजे गए थे और 15 सितंबर 2015 को एक दिवसीय हड़ताल भी की थी। जिसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से रोड टैक्स और अन्य टैैक्स माफ करने का आश्वासन दिया था जो अभी तक माफ नहीं हुआ है।
प्रदेशस्तरीय मीटिंग के बाद लिया गया था निर्णय
एंबुलेंस सोशल वेलफेयर एसोसिएशन सोसायटी के जिला प्रधान राजू दहिया ने बताया कि सरकार ने प्राइवेट एंबुलेंस पर लगे यात्री एवं वस्तु कर और रजिस्ट्रेशन कर को 6 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर 26 अक्टूबर 2014 से कम करने का फैसला लिया था, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से अभी तक अपने फैसले को लागू तक नहीं किया। हाल ही में परिवहन मंत्री के कमिश्नर की ओर से एक पत्र आया था, जिसमें कहा गया था कि निजी एंबुलेंस चालकों का कोई कर माफ नहीं होगा। पत्र के मिलते ही एंबुलेंस चालकों के मंसूबों पर पानी फिर गया। जिसके बाद सीएम सिटी करनाल में हुई प्रदेशस्तरीय मीटिंग के अनुसार आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
प्राइवेट एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने से मरीज रहे परेशान
जिले में प्राइवेट एंबुलेंस सुविधा न मिलने से सोमवार को मरीज दिन भर परेशान रहे। सोनीपत, गोहाना सिविल अस्पताल व खानपुर मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट एंबुलेंस हड़ताल पर रही। इस दौरान मरीजों को सरकारी एंबुलेंस सेवा पाने के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ा। जिले मेें 60 प्राइवेट एंबुलेंस ऑपरेटर हड़ताल पर रहे।
तीन किलोमीटर दूर घर, सरकारी एंबुलेंस के लिए दो घंटे करना पड़ा इंतजार
गांव शाहपुर निवासी सुरजीत ने बताया कि उसकी पत्नी सुनीता ने ऑपरेशन से एक बच्ची को जन्म दिया है। सोमवार को उसे गायनी वार्ड से छुट्टी मिल गई, लेकिन सरकारी एंबुलेंस सेवा के लिए दो घंटे का समय मिला है। अस्पताल से सिर्फ तीन किमी दूर उसका घर है। यदि प्राइवेट एंबुलेंस संचालक हड़ताल पर न होते तो आज सरकारी का इंतजार नहीं करना पड़ा।
सैकड़ों मरीज भटकते रहे एंबुलेंस के इंतजार में
अस्पतालों में एक मरीज, दो मरीज नहीं, बल्कि सैकड़ों मरीजों एंबुलेंस की खातिर भटकते रहे। हड़ताल पर प्राइवेट एंबुलेंस जाने से चालकों ने कोई मरीज लाने व ले जाने से मना कर दिया था। सोमवार को कोई मरीज सरकारी एंबुलेंस सेवाओं पर निर्भर रहा तो कोई अपने निजी वाहनों का प्रयोग कर अपने स्थान तक पहुंचा।