22 साल की उम्र, छह बहनों में सबसे छोटी मोहिनी उर्फ मोना जांगड़ा ने माता शेरावाली और बालाजी के जयकारों के बाद बाक्सिंग रिंग में भी हर किसी को कायल कर दिया। कुरुक्षेत्र में दो दिन पहले संपन्न हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बाक्सिंग प्रतियोगिता में अपने पंच से तमिलनाडु, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश की खिलाड़ी को धूल चटाकर कांस्य पदक जीतने में कामयाब रही। बेहद उत्साहित मोना कहती हैं कि पिछले दिनों अमर उजाला ने रोहतक में जिस बाक्सिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया था, उसमें गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसका हौसला है। हालांकि खानपुर महिला विवि में बाक्सिंग कोच न होने से उसे काफी परेशानी आ रही है।
उपमंडल के गांव शामड़ी निवासी मोना जांगड़ा ने बताया कि उसके पिता सूबे सिंह मिस्त्री का काम करते हैं। हालांकि एक आंख खराब होने से परिवार के पालन-पोषण में काफी दिक्कत आ रही है। छह बहन और एक भाई है। पांच बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार के पालन-पोषण में पिता को सहयोग देने की जिम्मेदारी मोना पर आ गई है। इसी के चलते वह धार्मिक कार्यक्रमों में जागरण करती है। पहले वह प्रसिद्ध भजन गायक नरेंद्र कौशिक की मंडली में थी। बाद में उसने स्वयं की मंडली बना ली।
बाक्सिंग का शौक बचपन से
मोना ने बताया कि बचपन से ही बाक्सिंग का शौक रहा है। गांव से 12वीं पास की। उस समय लाखु बुआना निवासी अरुण मलिक गांव में बाक्सिंग की कोचिंग देने आते थे। छह माह कोचिंग ली, इससे विश्वास बढ़ा, लेकिन पारिवारिक दिक्कतों से जागरण में ज्यादा समय देने लगी। पिछले दिनों रोहतक में अमर उजाला ने बाक्सिंग प्रतियोगिता आयोजित की। उसमें पदक हासिल कर हौसला बढ़ा। उसने खानपुर से बीए करने के बाद बीपीएड में दाखिला लिया है।
विवि में कोच नहीं, फिर भी जीता मोना ने मेडल
खानपुर विवि में बाक्सिंग का कोच नहीं है। फिर भी अपने स्तर पर मोना ने ऑल इंडिया इंटर विवि प्रतियोगिता की तैयारी अपने दम पर की। इसके लिए उसने एक माह लाखु बुआना जाकर अरुण मलिक से कोचिंग ली। कोच व मोना की मेहनत रंग लाई और मोना ने कुरुक्षेत्र में हुई प्रतियोगिता में अपने भार वर्ग 75 किलोग्राम में कास्य पदक जीता। सिल्वर मैडल की फाइट में वह एमडीयू की खिलाड़ी से हार गई। मोना ने खानपुर विवि से मांग की है कि यहां पर एक बाक्सिंग कोच रखा जाए, ताकि वह अपना आगे का सफर जारी रख सके।