सोनीपत। जिले की हवा मंगलवार को बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 343 दर्ज किया गया, जिससे यह देश के तीसरे सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया। प्रदूषण के बेहद खराब श्रेणी में आने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगीं।
मंगलवार सुबह के समय जिले के बाहरी क्षेत्र में स्मॉग की परत छाई रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब स्थिति में आ गया। विशेषज्ञ प्रदूषण में इस उछाल का कारण आसमान में बादल छाने, हवा की गति रुकने, पराली जलाने, निर्माण कार्यों से उड़ रही धूल और वाहनों से निकल रहे धुएं को बताया है।
फिलहाल जिले में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप)-2 लागू है, लेकिन प्रदूषण का स्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे प्रशासन जल्द ही ग्रैप-3 लागू कर सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वह अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचें, कूड़ा या पत्ते न जलाएं और वायु गुणवत्ता सुधार में प्रशासन का सहयोग करें।
अस्पतालों में बढ़े सांस और एलर्जी के मरीज
शहर के अस्पतालों में प्रदूषण का असर अब स्पष्ट दिखने लगा है। नागरिक अस्पताल के चिकित्सक के अनुसार सांस, दमा और एलर्जी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। चिकित्सक ने बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
धीमी हवा बनी परेशानी का कारण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस समय जिले में हवा की गति बहुत धीमी है, जिसके कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में ही ठहर गए हैं। साथ ही निर्माण कार्यों, कूड़ा जलाने और वाहनों के अत्यधिक प्रयोग ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। बादलवाई छाने व हवा की गति कम होने से प्रदूषण में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। जल्द ही रात्रि के तापमान में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी।
- डॉ. प्रेमदीप, मौसम विज्ञानी, केवीके जगदीशपुर