रोडवेज को कैशलेस बनाने के लिए जिला मुख्यालय के बस स्टैंड पर लगाई गई पीओएस मशीन से पिछले 25 दिन में केवल एक ही टिकट कटा तो परिचालक ने पीओएस मशीन ही विभाग को वापस लौटा दी। रोडवेज के अधिकारियों व कर्मचारियों ने कैशलेस टिकट के लिए न तो यात्रियों को जागरूक किया और न ही यात्रियों ने कैशलेस टिकट लेने में रुचि दिखाई। यही कारण रहा कि परिचालक ने मशीन को कार्यालय में वापस जमा करा दिया, क्योंकि उसमें कोई नुकसान या उसके कोई गुम होने पर परिचालक को हर्जाना भरना पड़ सकता था।
नोटबंदी के बाद लेन-देन में लोगों को होने वाली परेशानी दूर करने के लिए सरकार ने कैशलेस को अपनाने की योजना बनाई थी। दुकानदार से लेकर सरकारी विभाग को कैशलेस बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने खूब जोर लगाया, लेकिन अब अधिकारियों की लापरवाही से फिर हालात पुराने जैसे होते जा रहे है। ऐसा ही कुछ रोडवेज विभाग में सामने आया है, जहां करीब 25 दिन पहले छह पीओएस मशीनों को बस अड्डे पर भेजा गया था। यह मशीनें सोनीपत, गोहाना, मुरथल पेट्रोल पंप, गन्नौर और खरखौदा बस स्टैंड पर लगाकर उनको कैशलेस करने का दावा किया गया था। सोनीपत बस अड्डे पर हर रोज करीब 25 हजार यात्री आते हैं, जिनके लिए विभाग ने एक बूथ पर पीओएस मशीन को रखा था। इसके लिए एक परिचालक की ड्यूटी लगाई। पहले ही दिन एक व्यक्ति ने पानीपत जाने के लिए पीओएस से टिकट कटवाई थी। अब मशीन को बस अड्डे पर लगे 25 दिन हो गए, लेकिन इससे दूसरी टिकट नहीं कटी। इससे परिचालक ने विभाग को यह मशीन वापस लौटा दी।
अधिकारी व कर्मचारी ने नहीं किया यात्रियों को जागरूक
विभाग ने बस अड्डा परिसर में जगह-जगह कैशलेस से टिकट मिलने के फ्लैक्स जरूर लगाए हैं, लेकिन इसके लिए किसी यात्री को जागरूक नहीं किया जा रहा है। कोई भी अधिकारी परिसर में यात्रियों के इसके प्रति जागरूक नहीं कर रहा। इस कारण यात्री सीधे कैश से टिकट ले लेते हैं और उनको यह तक नहीं कहा जाता है कि वह कैशलेस से टिकट ले सकते हैं।
पहले दिन ही कटी थी टिकट
बूथ पर कार्यरत परिचालक ने बताया कि 25 दिन पहले बूथ पर ऑनलाइन टिकट काटने के लिए उसे विभाग ने पीओएस मशीन सौंपी थी। पहले ही दिन केवल एक व्यक्ति ने मशीन से 40 रुपये की टिकट कटवाई थी। उसके बाद अब तक कोई यात्री कैशलेस टिकट कटवाने नहीं आया है। ऐसे में मशीन के गुम होने का डर बना रहता है, जिससे उसने मशीन का वापस कर दिया।
लोगों को खुद होना पड़ेगा जागरूक
कैशलेस को सफल बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रयासरत है। इसके लिए बस अड्डा परिसर में पीओएस मशीन भी लगाई गई थी, लेकिन कैशलेस के प्रति लोगों में रुचि नहीं दिख रही। इस कारण अभी तक पीओएस मशीन से केवल एक ही टिकट कटी है। लोगों को कैशलेस के प्रति जागरूकता दिखानी होगी। इससे कैशलेस को बढ़ावा भी मिलेगा और उन्हें फायदा भी होगा।
-रामचंद्र, सोनीपत डिपो इंचार्ज।