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यहां दवा है पर दवा वाला नहीं

Tue, 21 Feb 2017 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
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ट्यूलिप अस्पताल में रिकॉर्ड की जांच करते एसडीसीओ राकेश दहिया व डीसीओ रीतू रानी - फोटो : bureau
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केंद्र सरकार की ओर से एनजियो प्लास्टी के लिए इस्तेमाल होने वाले स्टेंट की कीमत कम करने के बाद भी हॉस्पिटलों में उसे ज्यादा दाम पर बेचे जाने की सूचना पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से शहर में सोमवार को छापेमारी अभियान चलाया गया। स्टेंट की जांच के लिए टीम शहर के चार प्राइवेट हॉस्पिटलों में पहुंची, जहां उनकी कीमत जांचने के साथ ही रिकॉर्ड को देखा गया। उन सभी जगह टीम को सब कुछ ठीक मिला। वहीं, मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट तैनात हैं या नहीं, उसकी जांच के लिए 11 हॉस्पिटल में छापा मारा गया। टीम को तीन जगह फार्मासिस्ट नहीं मिले। इस कार्रवाई से दिनभर अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा रहा। अधिकारियों का कहना है कि जिन-जिन अस्पतालों में कमियां पाई गईं, उन अस्पतालों को विभाग की ओर से नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।
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ठीक-ठाक मिला रिकॉर्ड
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर डॉ. साकेत कुमार के निर्देश पर एनजियो प्लास्टी में प्रयोग होने वाले स्टेंट के कीमत व रिकार्ड की जांच करने के लिए एक टीम का गठन किया गया। यह टीम सोमवार को असिस्टेंट स्टेट ड्रग कंट्रोलर मनमोहन तनेजा के नेतृत्व में सिविल अस्पताल पहुंची थी। इसमें करनाल से सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर परजिंदर सिंह, रोहतक से राकेश दहिया, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर कैथल से सुनील दहिया, सिरसा से संदीप गाहल्याण, सोनीपत से प्रवीन चौधरी व यमुनानगर से रीतू रानी आदि शामिल रहे। इस दौरान तीन टीमों को बांटकर छापेमारी अभियान शुरू किया गया। यह टीम शहर के निदान हॉस्पिटल, ट्यूलिप हॉस्पिटल, फिम्स हॉस्पिटल, सिग्नस हॉस्पिटल में जाकर स्टेंट के रिकॉर्ड को जांचा, जहां सब कुछ ठीक मिलने की बात कही जा रही है।
स्टेंट की अधिकतम कीमत 29,600 फिक्स
मनमोहन तनेजा ने बताया कि दिल के ऑप्रेशन में प्रयोग होने वाले स्टेंट की दिल्ली में कमी होने की सूचना मिल रही थी। इसके लिए निर्धारित मूल्य से ज्यादा राशि मरीजों से वसूली जा रही थी, जिस पर आयुष मंत्रालय के सचिव जयप्रिय प्रकाश से भी राज्यों के उच्चाधिकारियों को स्टेंट की जांच के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से स्टेंट की अधिकतम कीमत 29 हजार 600 रुपये की हुई है। ऐसे में मूल्य नियंत्रण के दायरे में आने के बाद मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों से स्टेंट खरीदने पर 29 हजार 600 रुपये तक वसूल सकती है। रेट फिक्स होने से पहले यही स्टेंट निर्धारित कीमत से चार से पांच गुणा ज्यादा बिक रहा था, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
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सेल्समेन नहीं दे सका दवा की ठीक जानकारी
असिस्टेंट स्टेट ड्रग कंट्रोलर मनमोहन तनेजा ने बताया कि छापे के दौरान ही 11 अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों पर फार्मासिस्ट को चेक किया गया। इस दौरान पाटिल नर्सिंग होम के रोहन मेडिकल, हांडा अस्पताल के न्यू एनएन मेडिकोज व कलावती अस्पताल में दीप फार्मा में कोई फार्मासिस्ट नहीं मिला। यहां पर तैनात सेल्समेन से बातचीत के दौरान दवाओं को जांचा तो वह दवाओं की ठीक से जानकारी नहीं दे सका।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर के निर्देश पर गठित टीम ने निजी हॉस्पिटलों में दिल के ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले स्टेंट के रिकॉर्ड व मेडिकल स्टोरों पर तैनात फार्मासिस्ट को जांचने के लिए शहर में छापेमारी अभियान चलाया। अभियान के दौरान तीन ऐसे अस्पताल मिले, जहां पर बिना फार्मासिस्ट के दवाएं बेची जा रही थीं। उन अस्पतालों को नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।
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-प्रवीन चौधरी, ड्रग कंट्रोल अधिकारी, सोनीपत
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