कुछ दिनों पहले एक फिल्म आई थी ‘ट्रैफिक’। इसमें एक बच्ची को दिल की बीमारी थी। बचना मुश्किल था, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि अगर किसी का दिल मिल जाए तो वह ट्रांसप्लांट करके उसे बचा सकते हैं। बच्ची पुणे के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती थी। जब वह मौत से लड़ रही थी, उसी दिन उसके परिवार वालों को पता चला कि एक लड़के का एक्सीडेंट हो गया है और उसकी जिंदगी कुछ घंटों की है। यह लड़का मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती है। बच्ची के पिता और मां ने लड़के पिता और मां को मनाने की अथक कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। अंतत: बहुत प्रयास के बाद वह मानें तो सबसे बड़ी मुसीबत थी छह घंटों के अंदर दिल को मुंबई से पुणे पहुंचाना। इतने हैवी ट्रैफिक के दौरान यह जिम्मेदारी मुंबई पुलिस को दी गई। काफी जद्दोजहद के बाद यह संभव हो सका और बच्ची को नई जिंदगी मिली। हालांकि यह तो एक फिल्म थी, लेकिन यह वास्तविक घटना गोहाना के एक परिवार के साथ घटी। बरोदा रोड पर सामान्य अस्पताल के नजदीक रहने वाले रामप्रसाद बंसल की पत्नी विमला बंसल दुनिया को अलविदा कहने के बाद कई लोगों के लिए जीवनदात्री बनकर उभरीं। उन्होंने नेत्रदान के साथ ही अंतिम संस्कार से पूर्व हार्ट, लीवर और दोनों किडनी दान कर दी। यह डोनेशन तब अतिरिक्त सार्थक हो गया जब साथ ही साथ जरूरतमंदों को अंगों का ट्रांसप्लांट भी कर दिया गया।
57 साल की विमला बंसल 2 जून से कोमा में थीं। उनके ब्रेन में क्लॉटिंग हो गई थी। वह दिल्ली में पंजाबी बाग स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थीं। उन्होंने रविवार दोपहर बाद 2.57 बजे अंतिम सांस ली। उनके कोमा में रहने के दौरान बंसल परिवार ने निश्चित कर लिया था कि मृत्यु की स्थिति में आंखों के साथ दोनों किडनी, हार्ट और लीवर को भी डोनेट किया जाएगा। अपनी इस इच्छा से परिवार ने मैक्स प्रशासन को भी अवगत करा दिया था। डोनेट अंग समय पर ट्रांसप्लांट हो जाएं, इसके लिए केजरीवाल सरकार ने भी सराहनीय पहल की। जरूरतमंदों के शरीरों में ट्रांसप्लांटेशन मैक्स को अपने साकेत स्थित अस्पताल में करना था। ऐसे में विमला बंसल के निधन के बाद गंभीर चुनौती थी कि अंग न केवल वक्त पर निकाल लिए जाएं, बल्कि वक्त रहते प्रत्यारोपण भी हो जाए। ऐसे में दिल्ली सरकार ने मैक्स के पंजाबी बाग के अस्पताल से एंबुलेंस के साकेत तक बिना बाधा यथाशीघ्र पहुंचने को सुनिश्चित किया और इसके लिए एंबुलेंस के गुजरने के रूट के ट्रैफिक को भी रुकवा दिया गया।
बेटी की पहल ने किया मां के अंगों को सार्थक
विमला बंसल के अंगदान में मुख्य भूमिका बेटी ऋचा गर्ग और दामाद विनय गर्ग की रही। विनय गर्ग एमबीए हैं। वह मैक्स अस्पताल, मोहाली में जॉब करते हैं। ऋचा पीएचडी कर रही हैं। ऋचा और विनय ने विनति की तो राम प्रसाद बंसल ने अपनी स्वीकृति की मुहर में देरी नहीं की। अंगदान के निर्णय को लेकर पूरा परिवार एकजुट रहा। पति, बेटी और दामाद के साथ बेटे-बहू सुमित बंसल और निशा बंसल, मनीष बंसल और हेमा बंसल, पोते-साहिल, अनमोल और लक्षित तथा दोहते विधान, सास नान्टी देवी, मां सरस्वती और पिता भगत राम पुण्य के भागी बने। मृतका के ससुर ओमप्रकाश बंसल का भी नेत्रदान हो चुका है। इस बारे में प्रसिद्ध सर्जन डॉ. सीडी शर्मा का कहना है कि लीवर, किडनी और हार्ट का मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांटेशन हो सकता है।