23 सब डिवीजनों को निजी कंपनियों के हवाले करने के विरोध में बिजली निगम कर्मचारी दो दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल पर चले गए। पहले दिन जिले के 849 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बिजली व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों के साथ 564 कर्मचारी रहे। हड़ताल का फायदा लोगों को हुआ, जिन्होंने पूरा दिन बिजली कट नहीं देखा। वहीं, करोड़ों रुपये का घाटा उठा रहे बिजली निगम को 5 लाख यूनिट अतिरिक्त देनी पड़ी।
वहीं, सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन की ओर से सभी 39 पावर हाउस पर पुलिस की तैनाती की गई थी। हालांकि, शहर के एक-दो पावर हाउस को छोड़कर अन्य सभी से खाकी वर्दी नदारद रही। बता दें कि बिजली कर्मियों की हड़ताल को जिले में लगभग 15 संगठनों ने समर्थन दिया है। कर्मचारी पहले तो इंदिरा कालोनी स्थित सब डिवीजन कार्यालय में एकजुट हुए, लेकिन बाद में रेस्ट हाउस में सभी ने हड़ताल की। यहां पर कर्मचारी नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित किया। देर शाम तक धरना जारी रहा।
यह रही कर्मचारियों की स्थिति
बिजली निगम के पास 1412 कुल कर्मचारी हैं। इनमें 1064 सरकारी और 348 निजी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से बिजली निगम के 806 सरकारी कर्मचारी और 43 निजी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल पर जाने के बाद 258 सरकारी और 305 निजी कर्मचारियों तथा तीन अन्य कर्मचारियों ने बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी संभाली। इस तरह से कुल 566 कर्मचारियों के हाथों में ही बिजली व्यवस्था रही।
95 लाख यूनिट हुई खर्च
राज्यव्यापी हड़ताल के चलते जिले में बिजली सुचारू रूप से चलाने के लिए जहां रोजाना 85 से 90 लाख यूनिट खर्च होती थी। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए बुधवार को 5 लाख यूनिट अतिरिक्त खर्च की गई। बिजली की सप्लाई कहीं भी कट नहीं की गई। इस तरह से बुधवार को जिले में 95 लाख यूनिट खर्च हुई है।
पांच संगठनों ने दिया समर्थन
बिजली निगम के कर्मचारियों की हड़ताल में कर्मचारियों की मांगो का समर्थन देते हुए किसान यूनियन, किसान सभा, सीटू, बैंक एसोसिएशन, खेत मजदूर यूनियन, रोडवेज यूनियन, वन विभाग कर्मचारी यूनियन, हरियाणा महासंघ, कर्मचारी महासंघ व अन्य लगभग 15 संगठनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया और निजीकरण का विरोध किया है।
कार्यालयों में खाली रही कुर्सियां
कर्मचारियों की हड़ताल से कार्यालयों में कोई भी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाया। हालांकि, कुछ कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात रहे। लेकिन अधिकतर कार्यालयों के कमरों में कर्मचारियों के बिना कुर्सियां खाली पड़ी रहीं।
बदला गया ड्यूटी मजिस्ट्रेट
जिला मजिस्ट्रेट के मकरंद पांडुरंग ने आदेश जारी करते हुए बिजली निगम कर्मचारी यूनियनों द्वारा की जारी हड़ताल के मद्देनजर थाना बरोदा थाना क्षेत्र में बीडीपीओ गोहाना खजान सिंह के स्थान पर नरेंद्र दलाल तहसीलदार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है।
बिजली व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाया जा रहा है। अभी तक किसी कि गिरफ्तारी नहीं की गई है। जो कर्मचारी बिना बताए गए हैं, उन्हें सस्पेंड किया जाएगा और निजी कर्मचारियों को निकाला जाएगा। लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारियों के हड़ताल पर होने के बाद भी घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति की गई है।
एसएन शर्मा, एसई बिजली निगम