गबरू भाई लंबारिया के अस्थि कलश और परिजनों के साथ संत गोपाल दास।
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गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलवाने के लिए अब देश भर का संत समाज नवंबर के महीने में दिल्ली में डेरा डाल देगा। गुजरात के गबरू भाई लंबोरिया के अस्थि कलश को भागीरथी में प्रवाहित करने हरिद्वार जाते हुए गोहाना रुके संत गोपाल दास ने यह बात कही।
इस दौरान संत गोपालदास ने पुरानी अनाजमंडी के जैन स्थानक में शोक संतप्त परिजनों को संथारा के लिए संलेखना कर रहे गच्छाधिपति प्रकाश चंद और शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि का आशीर्वाद दिलवाया। गुजरात के राजकोट शहर में गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने में हो रहे विलंब के विक्षोभ में कलैक्टरेट के सामने 18 अप्रैल को आठ गौभक्तों ने विषपान किया था। वहां के जसदन गड़रिया गांव के गबरू भाई लंबारिया की मृत्यु हो गई। 21 अप्रैल को संत गोपाल दास वहां से गबरू भाई लंबारिया के अस्थि कलश को हरिद्वार के लिए लेकर चले। अस्थि कलश के साथ मृतक गौ भक्त के भाई विहास भाई, चाचा मेहराब भाई और एक अन्य ग्रामीण अरविंद भाई भी हैं।
वादे से पीछे हट रही भाजपा सरकार
संत गोपाल दास ने बताया कि पहले गबरू भाई लंबारिया के अस्थि कलश को 26 अप्रैल को हरिद्वार में गंगाजी में प्रवाहित किया जाना था। लेकिन गौ माता के लिए अपने जीवन की कुर्बानी देने वाले गबरू भाई से समाज को प्रेरणा मिल सके, इसके लिए उनके अस्थि कलश को अभी दो दिन हरियाणा और आगे के दो दिन उत्तर प्रदेश में परिभ्रमण करवाया जाएगा। संत गोपाल दास ने कहा कि बाकायदा अपने चुनाव घोषणा पत्र में प्रावधान करने वाली सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अब जिस प्रकार से गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने से पीछे हट रही है, वह संत समाज के लिए पीड़ाकारी है। सात नवंबर 2016 को देशभर के लिए संत आर-पार के संघर्ष के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में डेरा डाल लेंगे।
अपने रक्त से लिखा पत्र
आप संकल्प करें कि 22 मई के शाही स्नान से पहले आप गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलवाने का भरसक प्रयास करेंगे। यह आग्रह संत गोपाल दास ने अपने रक्त से लिखे उस पत्र में किया है, जिसे उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ मेले में वहां के सब 13 अखाड़ों के प्रभारियों को भेजा गया है।