नियम 134-ए को लेकर अब तक रेफरी का काम कर रहा प्रशासन अब ड्राइवर सीट पर आ गया है। इसी के तहत सख्ती दिखाते हुए एसडीएम ने शनिवार को सोनीपत ब्लॉक के सभी निजी स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। धारा-144 के तहत जारी इन नोटिस में नियम 134-ए के तहत दाखिले नहीं देने पर 13 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं ब्लॉक के 8 मुख्य स्कूल संचालकों के खिलाफ एसडीएम ने अपनी अदालत में धारा-133 के तहत केस दायर किया है। दूसरी ओर निजी स्कूल संचालकों ने इन नोटिसों के खिलाफ अदालत में जाने का मन बना लिया है। बता दें कि पिछले दो सालों में प्रशासन की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले निजी स्कूल संचालकों के साथ केवल बैठकों का सिलसिला चलता था। दो साल से निजी स्कूल संचालकों और अभिभावकों के बीच नियम 134-ए के तहत दाखिलों को खींचतान ही चल रही है। पिछले वर्ष जहां अधिकतर बच्चों के दाखिले हो गए थे, वहीं इस वर्ष 2 हजार के करीब पात्र बच्चों में से कुछ के ही दाखिले हो पाएं हैं।
जिन स्कूलों पर दायर किया गया है केस
उपमंडल मजिस्ट्रेट की अदालत में उपमंडल के आठ मुख्य स्कूलों के खिलाफ धारा-133 के तहत मामला दायर किया गया है। इन स्कूलों में ऋषिकुल विद्यापीठ, लिटल एंजल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ज्ञान गंगा ग्लोबल स्कूल, श्रीजी इंटरनेशनल स्कूल, शिव शिक्षा सदन, जानकीदास स्कूल, डीएवीएम और सत्यम मार्डन स्कूल शामिल हैं। इन सभी स्कूलों को 12 जुलाई को प्रात: 10 बजे सुनवाई के लिए उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
क्या है धारा 133 और 144
धारा-144 के बारे में अधिकतर लोगों को पता है। प्रशासन द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लगाई जाती है। इसमें लोगों के इकट्ठे होने पर रोक होती है। वहीं धारा-133 के बारे में एसडीएम निशांत यादव ने बताया कि इसके तहत प्रशासन उन व्यक्ति, संस्था के खिलाफ केस दायर कर सकती है, जिनकी वजह से भविष्य में कोई हिंसक घटना संभावित हो। इसी अंदेशे को देखते हुए केस दायर कर उनसे स्थिति के बारे में बात की जाती है।
बीईओ होगा व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी जिले सिंह ने सभी स्कूल मुखिया से कहा है कि जिन बच्चों के दाखिले उनके स्कूल में अलॉट किए गए हैं वह सभी तुरंत प्रभाव से उन्हें प्रवेश दें। इसकी रिपोर्ट 14 जुलाई तक संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को प्रेषित करें। जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिले सिंह ने कहा कि सभी खंड शिक्षा अधिकारी भी प्राप्त सूची को इकट्ठा कर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को प्रेषित करेंगे और हर हालात में 15 जुलाई तक यह पूरा डाटा भेजना सुनिश्चित करेंगे। अगर किसी विद्यार्थी को स्कूल अलॉट नहीं हुआ है तो जैसा यूडाईश डाटा में ब्यौरा दिया गया है उसी के अनुसार उसे स्कूल अलॉट किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी अभिभावक को दाखिले के लिए न भटकने दिया जाए। अगर किसी तरह की कोताई पाई गई तो संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा।
ये है स्थिति
नियम 134-ए के तहत दो बार लर्निंग लेवल टेस्ट कराया जा चुका है। पहला टेस्ट 1 मई को हुआ था। इसके लिए 6518 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 5263 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे। 5 मई को रिजल्ट आया था, जिसमें कुल 1753 विद्यार्थी 55 प्रतिशत अंक लेकर परीक्षा में क्वालीफाई कर पाए। दूसरा टेस्ट 3 जुलाई को लिया गया, जिसका रिजल्ट 8 मई को निकाला गया, जिसमें 1936 बच्चों में से केवल 434 बच्चे ही 55 प्रतिशत अंक ले पाए थे। मतलब ये कि कुल 2187 बच्चों के दाखिले होने हैं।
बार-बार शिकायत मिल रही थी कि निजी स्कूल दाखिला नहीं कर रहे, इसीलिए उन्हें नोटिस जारी किया गया है। अगर कोई निजी स्कूल संचालक अब भी आनाकानी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
-निशांत यादव, एसडीएम, सोनीपत
माननीय अदालत के निर्देश हैं कि दाखिला दें और सरकार उन बच्चों की फीस। हम दो साल से बच्चे पढ़ा रहे हैं, अब तक एक रुपया भी नहीं मिला। सरकार ने इसके लिए कोई तरीका सोचा नहीं है, हम पर दबाव बनाया जा रहा है दाखिले के लिए। प्रशासन ने जो नोटिस भेजा है, उसके खिलाफ अदालत की शरण लेंगे। प्रशासन के खिलाफ अदालत में अपील करेंगे। इस संदर्भ में सोमवार को बैठक होगी।
-अजमेर सिंह, प्रधान, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ