हड्डी रोगियों को ऑप्रेशन कराने के लिए बाहर से सामान नहीं खरीदना पड़ेगा। सिविल अस्पताल में हड्डी रोगियों को अब सर्जरी के लिए पूरा सामान मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय की ओर से सिविल सर्जन को इस संदर्भ में गाइडलाइन जारी कर दी गई है। हड्डी टूटने पर प्लास्टर से लेकर ऑप्रेशन के दौरान प्रयोग होने वाले सामान की खरीद करने के लिए सिविल सर्जन ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को आदेश दिए हैं। जल्द ही एक कमेटी का गठन करके ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए सामान खरीदा जाएगा।
सिविल अस्पताल में हर माह करीब एक से डेढ़ हजार ऑर्थोपेडिक मरीज आते हैं। इनमें हाथ व पैर की हड्डी टूटने पर रॉड या प्लेट डलवाने के लिए मरीजों आते हैं। सर्जरी कराने के लिए मरीजों को बाहर से सामान खरीदना पड़ता है। ऑर्थोपेडिक सर्जरी के सामान अस्पताल में उपलब्ध न होने पर मरीज को बाजार से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सामान को खरीदने के लिए मरीज को हजारों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। गरीब मरीज को ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए पैसे की किल्लत होती थी तो उसे अस्पताल से पीजीआई रोहतक या फिर दिल्ली रेफर कर दिया जाता था। इससे मरीज को और भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
मुख्यालय जारी करेगा बजट
हड्डी मरीजों की समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है कि हड्डी ऑप्रेशन के लिए मरीज को बाहर से सामान न मंगवाया जाए। अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जरी के सामान को खरीदने के लिए बजट का प्रपोजल तैयार कर मुख्यालय भेज दिए जाए। मुख्यालय की ओर से बजट जारी होने के बाद अस्पताल में सामान की मरीज को समय पर इसकी सुविधा दी जाए।
पांच से 25 हजार का खरीदना पड़ता है सामान
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी शर्मा ने बताया कि मुख्यालय की ओर से बजट जारी होने के बाद ऑप्रेशन के लिए चयनित मरीजों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बाजार में सर्जरी के सामान की कीमत पांच से 25 हजार रुपये तक है। अस्पताल में सामान उपलब्ध होने पर मरीज को हजारों रुपये खर्च करने पर परेशानी दूर हो जाएगी।
ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए अस्पताल में ही मरीजों को सामान उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यालय की ओर से जारी गाइडलाइन पर संज्ञान लेते हुए मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को आदेश दिए गए हैं कि वे जल्द ही एक कमेटी का गठन तक सामान की खरीद करवाएं।
डॉ. जसवंत सिंह पूनिया, सिविल सर्जन