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एक साल में सफाई का ठेका कर दिया 26 से 80 लाख रुपये

Tue, 07 Feb 2017 12:31 AM IST
अंकित चौहान ब्यूरो सोनीपत।
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शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के जिले में नगर निगम की ओर से छोड़े गए सफाई के ठेके में झोल नजर आ रहा है। जहां पहले सफाई का ठेका 26 लाख रुपये में रहता था, वहीं अब इसे लगभग 80 लाख रुपये में पहुंचा दिया गया है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि इस बार घर-घर जाकर कूड़ा उठाने से लेकर प्रबंधन स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ठेकेदार को दी गई है, जिससे उसका काम बढ़ गया है, लेकिन इन दोनों काम के लिए ठेके में हर महीने 54 लाख रुपये बढ़ाने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। वहीं, निगम की ओर ठेका देने के लिए जिस टेंडर नोटिस को निकाला गया है, उसमें न रकम खोली गई है और न तारीख लिखी गई है।
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अक्तूबर में निकाला जाना था ठेका
नगर निगम की ओर से शहर की सफाई के लिए अक्तूबर 2015 में ठेका छोड़ा गया था जो एक साल पूरा होने पर अक्तूबर 2016 में खत्म हो गया। उस समय सफाई का ठेका दोबारा छोड़ा जाना था और उसके लिए जिले स्तर पर पॉलिसी तैयार करके टेंडर भी मांग लिए गए थे, लेकिन शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पास शिकायत पहुंची कि प्रदेश में जिले स्तर पर सफाई टेंडर को लेकर ठेकेदारों से मिलीभगत करके पॉलिसी तैयार कर दी गई है। वह पॉलिसी इस तरह तैयार की गई कि उसकी शर्तों को चंद ठेकेदार ही पूरी करते हैं, जिनको ठेका दिया जाना है। इस कारण ही टेंडर प्रक्रिया रोककर विभाग ने पूरे प्रदेश की एक ही पॉलिसी बनाने के लिए कहा था और पिछले महीने ही पॉलिसी बनाकर ठेके छोड़ने के लिए कहा गया। उसके बाद भी नगर निगम की ओर से तीन दिन पहले छोड़े गए ठेके में बड़ा झोल सामने आ रहा है।
नहीं हजम हो रही 54 लाख बढ़ाने की बात
हालांकि ठेका छोड़कर अभी वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया, क्योंकि उनकी कागजी कार्रवाई बाकी रह रही है, लेकिन जिस तरह से उतनी ही जगह की सफाई का 26 लाख का ठेका पहले था, अब उतनी ही जगह का लगभग 80 लाख का ठेका किसी के गले नहीं उतर रहा है। इस बार के ठेके में केवल घर-घर जाकर कूड़ा उठाने, उसे अपनी गाड़ी से कूड़ा प्रबंधन स्थल तक पहुंचाने का काम बढ़ाया गया है। इसके साथ ही कुछ मशीन पहले नगर निगम की इस्तेमाल की जाती थीं, जिसकी अब जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। इसके बावजूद भी 54 लाख रुपये हर महीने ज्यादा का ठेका कई सवाल खड़े कर रहा है।
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पहले ठेकेदार ने किया था खेल, निगम ने रोकी पेमेंट
जिस ठेकेदार के पास शहर की सफाई का 26 लाख रुपये में ठेका था, उसे ही अब लगभग 80 लाख रुपये में ठेका दिए जाने की बात कही जा रही है, जबकि पहले वाले ठेकेदार ने बड़ा खेल किया था और उस पर लगातार कई आरोप लगे थे। उस पर निगम की शर्तों के अनुसार काफी कम कर्मचारी रखने का आरोप था। इसके अलावा कर्मचारियों का जीपीएफ नहीं काटने का आरोप भी लगाया गया था। यह आरोप सही भी मिले थे और इस कारण ही ठेकेदार की पिछले ठेके की लाखों रुपये की पेमेंट निगम की ओर से रोक दी गई है।
टेंडर नोटिस में न रकम खोली, न तारीख लिखी
निगम की ओर से सफाई का ठेका छोड़ने के लिए टेंडर जारी किया गया है, उसमें भी पूरी जानकारी नहीं दी गई है। इससे भी निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो रहा है। उस टेंडर नोटिस में न यह रकम खोली गई है कि कितने रुपये का टेंडर है और न यह तारीख लिखी गई कि टेंडर कब खोला जाएगा। इस तरह कई चीजें है, जिनसे ठेके में बड़ा झोल दिख रहा है।
रुपयों के साथ काम बढ़ाया गया
शहर की सफाई के ठेके की अनुमानित लागत 80 लाख रुपये से ज्यादा थी, जबकि ठेका लगभग 80 लाख रुपये का छोड़ा गया है। इस बार घर-घर जाकर कूड़ा उठाना, उसे कचरा प्रबंधन स्थल तक पहुंचाना, मशीनें बढ़ाना आदि कई चीजें शामिल हैं। इस कारण ठेके की राशि को बढ़ाया गया है, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था बेहतर तरीके से हो सके। ठेकेदार के काम शुरू करने के बाद ही बताया जा सकेगा कि वह किस तरह से शहर की सफाई करा रहा है।
-वीरेंद्र हुड्डा, कमिश्नर नगर निगम
पहले जांच होगी, फिर देंगे वर्क आर्डर
निगम ने शहर में सफाई का ठेका पहले के मुकाबले 54 लाख रुपये ज्यादा में छोड़ने का मामला संज्ञान में आया है। नगर निगम के अधिकारियों से पूछा गया है कि आखिर इतना ज्यादा ठेका कैसे है, जिसमें बताया गया कि घर-घर से कूड़ा उठाने में दोगुने कर्मचारी व काफी गाड़ियां लगेंगी। इसके बावजूद अभी पूरे मामले की सही तरीके से छानबीन कराने को कहा गया है और उसके बाद ही वर्क आर्डर दिया जाएगा।
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-कविता जैन, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री
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