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एक घंटे तक नहीं पहुंची एंबुुलेंस, ऑटो में जन्मा बच्चा

Wed, 03 May 2017 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
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जिले में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेहाल हैं तो एंबुलेंस पर तैनात कर्मचारी मनमानी करते हैं। एंबुलेंस चालकों की मनमानी का एक मामला मंगलवार को सामने आया, जिसमें एक महिला मंगलवार सुबह को प्रसव पीड़ा से तड़पती रही और एंबुलेंस के लिए एक घंटे तक कंट्रोल रूम में फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस उनके घर तक नहीं पहुंची। इसके बाद परिजन उस महिला को ऑटो में लेकर अस्पताल जाने लगे तो अस्पताल पहुंचने से पहले गेट पर ही महिला ने ऑटो में बच्चे को जन्म दिया। इससे अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया और महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया तो बच्चे को नर्सरी में रखा गया। वहीं, यह मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसमें जांच कराने की बात कह रहे हैं।
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अस्पताल के गेट पर दिया जन्म
मूलरूप से यूपी के रहने वाले राजकिशोर इस समय अपने परिवार के साथ धतूरी गांव में रहते है। उसकी पत्नी गर्भवती थी, जिसे मंगलवार सुबह लगभग छह बजे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। राजकिशोर ने पत्नी को अस्पताल लेकर जाने के लिए 102 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस भेजने को कहा था। उसके बावजूद काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची तो उसने दोबारा से एंबुलेंस मंगवाने के लिए कंट्रोल रूम में सूचना दी। इस तरह राजकिशोर ने कई बार एंबुलेंस के लिए कंट्रोल रूम में फोन किया क्योंकि उसकी पत्नी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। एक घंटे तक कई फोन करने के बावजूद एंबुलेंस नहीं आने पर उसने किराये पर ऑटो किया। उस ऑटो में पत्नी को लेकर वह सोनीपत नागरिक अस्पताल में जाने लगा। वह अस्पताल के गेट तक ही पहुंचा था कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा काफी बढ़ गई और उसने अस्पताल के गेट पर आटो में बच्चे को जन्म दे दिया। इसकी सूचना अस्पताल के प्रसूति विभाग में दी गई, जिससे वहां हड़कंप मच गया और वहां से महिला कर्मी गेट की ओर दौड़ पड़ीं। महिला कर्मियों ने तुरंत ही महिला को जच्चा बच्चा वार्ड में भर्ती कराया तो बच्चे को नर्सरी में भर्ती कराया गया।
जोखिम में पड़ गई जच्चा-बच्चा की जान
महिला के पति राजकिशोर ने बताया कि वह एक घंटे तक एंबुलेंस मंगवाने के लिए फोन करता रहा, लेकिन उसको एंबुलेंस के लिए मना भी नहीं किया गया। उसे एंबुलेंस भेजने से मना कर दिया जाता तो वह पहले ही ऑटो में पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंच जाता। एंबुलेंस वालों की लापरवाही के कारण उसकी पत्नी व बच्चे की जान जोखिम में पड़ गई। उसका कहना है कि उसे अस्पताल में आने पर बताया गया कि एंबुलेंस दूसरी जगह गई हुई थी, लेकिन उसको सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वह एक घंटे तक फोन करता रहा और न एंबुलेंस भेजी गई तो न सही जवाब दिया गया।
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पहले भी हुए इस तरह के मामले
अस्पताल के गेट पर बच्चे को जन्म देने का यह कोई पहला मामला नहीं है। डेढ़ महीने पहले अस्पताल कर्मियों ने एक महिला को भर्ती करने से इंकार कर दिया था, जिससे उसने बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया था। उसको लेकर भी काफी हंगामा हुआ था और उसमें जांच शुरू कराई गई थी। वहीं, एक महीने पहले भी जब महिला को परिजन अस्पताल में लेकर जा रहे थे तो उसने भी आटो में अस्पताल के गेट पर बच्चे को जन्म दे दिया था।
लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई
गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने ले जाने के लिए मुफ्त में एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है। एक घंटे तक भी फोन करने के बावजूद एंबुलेंस नहीं पहुंची है तो इसकी जांच कराई जाएगी। इसमें किसी तरह की लापरवाही मिलती है तो उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
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-जेएस पूनिया, सीएमओ।
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