आरक्षण की मांग को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष के आंदोलन के दौरान सुरक्षा में तैनात अर्द्धसैनिक बलों की सभी टुकड़ियों को वापस भेज दिया गया है। आंदोलन को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद पहले ही 21 टुकड़ियों को वापस भेज दिया गया था। अब जिले में तैनात बाकि नौ टुकड़ियों को भी वापस भेज दिया गया है। यह मूनक नहर व हाईवे पर तैनात थीं।
जिले में 29 जनवरी को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की तरफ से गांव जौली लाठ पर धरना शुरू किया गया था। फरवरी, 2016 में हुए उपद्रव से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार किसी तरह के उपद्रव से बचने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। इसी के चलते जिले में करीब अर्द्धसैनिक बलों की 30 टुकड़ियां मंगवाई थीं। जिले में हाईवे के साथ ही मूनक नहर पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। बाद में समिति से मुख्यमंत्री की बातचीत व जल्द धरने समाप्त करने के आश्वासन के बाद सुरक्षा में लगे अर्द्धसैनिक बलों को भी वापस भेजा जाने लगा था ताकि सरकार पर पड़ रहे आर्थिक नुकसान से बचा जा सके। इसी के चलते पहले अर्द्धसैनिक बलों की 21 कंपनियों को वापस भेजा गया। अब जिले में तैनात बाकि नौ कंपनियों को भी वापस भेज दिया गया है। इनमें सीआरपीएफ की तीन व आएएफ की छह टुकड़ी शामिल थीं।
रोडवेज यात्रियों को मिली राहत
सुरक्षा में तैनात नौ कंपनियों को आवागमन के लिए 12 बसें प्रदान की गई थीं, जिससे कई रूटों पर यात्रियों को परेशानी हो रही थी। अब सभी टुकड़ियों के वापस जाने के बाद बसों को भी वापस बुला लिया गया है। शनिवार से यात्रियों को बसों की कोई कमी नहीं रहेगी, जिससे उन्हें राहत मिल सकेगी।
जिले से अर्द्धसैनिक बलों की सभी कंपनियां वापस भेज दी गई हैं। पुलिस के जवान भी सुरक्षा को लेकर तैनात हैं। सुरक्षा में किसी प्रकार की कोताही नहीं रहेगी।
-अश्विन शैणवी, पुलिस अधीक्षक।