नगर निगम में शामिल किए गए 26 गांवों के लोगों की भले ही प्रॉपर्टी टैक्स माफ किए जाने की मांग पूरी हो गई हो, लेकिन उनका निगम के खिलाफ विरोध नहीं थम रहा है। वीरवार को 26 गांवों के लोगों ने निगम के खिलाफ शहर में जुलूस निकाला और लघु सचिवालय में पहुंचकर हंगामा किया। वहां सीटीएम को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर गांवों को नगर निगम से बाहर करने की मांग की गई और पंचायतों में जमा 300 करोड़ रुपया अन्य जगह खर्च करने का आरोप लगाया। वहीं, चेतावनी दी गई है कि सात मार्च तक मांग पूरी नहीं की गई तो सर्व कर्मचारी संघ के साथ मिलकर चंडीगढ़ में विधानसभा घेराव किया जाएगा।
300 करोड़ रुपये निगम ने अपने पास कराए स्थानांतरित, विकास शून्य
सोनीपत नगर परिषद को नगर निगम बनाने के लिए 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। इसके बाद गांवों की प्रॉपर्टी का सर्वे कराकर बिल जमा करने को नोटिस भेज दिए तो इसका लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के प्रस्ताव पर सीएम मनोहर लाल ने गांवों का दो साल का प्रॉपर्टी टैक्स माफ कर दिया है, लेकिन उसके बाद भी गांवों का निगम के खिलाफ विरोध कम नहीं हो रहा है। पंचगामा प्रधान महेंद्र कटारिया ने बताया कि सोनीपत नगर निगम में जिन 26 गांवों को शामिल किया गया है, उनके पास 3748 एकड़ पंचायती जमीन व 300 करोड़ रुपये जमा थे। उनको निगम ने अपने पास स्थानांतरित करा लिया और उसके बाद गांवों में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया गया। पंचायतों का पैसा भी वहां खर्च नहीं किया जा रहा है, बल्कि उस पैसे को अन्य जगह लगाया जा रहा है। इस कारण ही गांवों को निगम से बाहर करने की मांग उठाई गई है। इसके लिए ही वीरवार को 26 गांवों के लोग मामा भांजा चौक से गीता भवन चौक, दयाल चौक, पुरखास अड्डा, शनि मंदिर, छोटूराम चौक से जुलूस निकालते हुए लघु सचिवालय तक पहुंचे। जहां निगम के विरोध में हंगामा किया गया और कहा गया कि वह निगम के किसी भी कर्मचारी को अपने गांव में नहीं घुसने देंगे। लोगों को हंगामा करते देखकर सीटीएम सुरेंद्र दून उनके पास पहुंचे, जिनको सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसके अलावा कहा गया कि सात मार्च तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया तो वह चंडीगढ़ कूच करके विधानसभा का घेराव करेंगे।
अपनी मर्जी से काम कराती थी पंचायत
ब्लॉक समिति सोनीपत के पूर्व चेयरमैन महाबीर सिंह ने बताया कि पंचायतों के माध्यम से हर गांव में अपने तरीके से विकास कार्य करवाते थे। किसी ग्रामीण को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। हर पंचायत ही गलियों की सफाई करवाती थी। इस तरह खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अंबाला नगर निगम की बदहाली को देखकर नगर निगम भंग करने की सिफारिश की थी, उसी प्रकार सरकार सोनीपत नगर निगम से 26 गांवों को बाहर किया जाए। इस दौरान श्रद्धानंद सोलंकी, बिजेंद्र पूर्व सरपंच नांगल खुर्द, रणसिंह, खेमचंद रेवली, हरिप्रकाश उर्फ पप्पू, रामकिशन फौजी, हवासिंह पहलवान दीपालपुर, बिजेंद्र फाजिलपुर, जयबीर जाटजौशी, जेपी रेवली, जयभगवान, पूर्व नप पार्षद विमल किशोर सहित अन्य भी मौजूद रहे।
300 करोड़ लेकर 32 करोड़ लगाने की तैयारी
नगर निगम बनने के बाद 26 गांवों का लगभग 300 करोड़ रुपया निगम के पास आया है। इसमें से जल्द ही 32 करोड़ रुपये के काम कराए जाने की बात कही जा रही है और उनके टेंडर लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों के उन 300 करोड़ रुपये में से लगभग 70 करोड़ रुपये दूसरी जगहों पर खर्च कर दिए गए, जबकि जिन गांवों का पैसा था उन पर केवल 32 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस तरह का भेदभाव लगातार होता रहेगा, इस कारण गांवों को निगम से बाहर कराया जाना जरूरी है।
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन से सीधी बात
सवाल : निगम में शामिल 26 गांवों के लोगों की क्या मांग थी?
जवाब : उनकी विकास कराने के बाद ही प्रॉपर्टी टैक्स बिल जमा कराने की मांग थी, जिसे सीएम ने मान लिया और दो साल तक के लिए प्रॉपर्टी टैक्स बिल में छूट कर दी गई है।
सवाल : यह मांग पूरी होने के बाद भी विरोध क्यों किया जा रहा है?
जवाब : अब विरोध करने की कोई बात ही नहीं रही है। जहां तक विकास की बात है तो वह शुरू करा दिया गया है और यह विकास सभी गांवों में तेजी से होगा।
सवाल : विरोध करने वालों को कैसे समझाया जाएगा?
जवाब : लोगों को विरोध नहीं करना चाहिए, क्योंकि निगम में शामिल होने के बाद गांवों में विकास ज्यादा होगा। लोगों को विरोध की जगह विकास में सहयोग करना चाहिए। लोगों को यह बात बताई जाएगी कि निगम से उनको कितना फायदा है।